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स्पेन में समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्पेन में संसद के निचले सदन ने समलैंगिक विवाह के पक्ष में मतदान किया है. पिछले सप्ताह ऊपरी सदन सीनेट ने इसे नामंज़ूर कर दिया था. स्पेन में समलैंगिकों में विवाह के साथ-साथ अब समलैंगिक जोड़े बच्चों को गोद भी ले सकेंगे. निचले सदन में इस विधेयक पर हुए मतदान में 187 मत पक्ष में पड़े जबकि 147 मत इसके विपक्ष में पड़े. चार सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. निचले सदन में इसे मंज़ूरी मिलने के बाद अब एक महीने के अंदर यह क़ानून बन जाएगा. नीदरलैंड और बेल्जियम के बाद स्पेन यूरोप का तीसरा देश है जहाँ समलैंगिक विवाह को अनुमति मिल गई है. स्पेन के निचले सदन में इस विवादित विधेयक पर मतदान से पहले एक रोमन कैथोलिक ग्रुप ने सांसदों को छह लाख लोगों के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन सौंपा था जिसमें समलैंगिक विवाह का विरोध किया गया था. फ़ैमिली फ़ोरम नाम के इस ग्रुप ने इस मुद्दे पर जनमतसंग्रह कराने की भी मांग की थी. इस ग्रुप ने कंज़र्वेटिव सांसदों से अपील की थी कि वे समलैंगिक विवाहों को असंवैधानिक घोषित करने के लिए क़ानूनी क़दम उठाएँ. स्पेन में हुए कई जनमत सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई कि हालाँकि यहाँ के बहुसंख्यक लोग अपने को कैथोलिक कहते हैं लेकिन वे समलैंगिक विवाह के पक्ष में हैं. स्पेन के रोमन कैथोलिक चर्च के नेताओं ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया था. कुछ लोगों ने तो इस विधेयक को स्पेनी समाज में वायरस की संज्ञा तक दे दी थी. स्पेन के कई स्थानीय मेयर ने कहा है कि वे समलैंगिक विवाह में मौजूद नहीं रहेंगे. एकता मैड्रिड स्थित बीबीसी संवाददाता कात्या एडलर ने बताया है कि स्पेन में रोमन कैथोलिक चर्च का बहुत प्रभाव है लेकिन मार्च 2004 में मैड्रिड धमाकों के बाद स्पेनिश लोग एकता पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं.
स्पेन में समलैंगिक विवाह वाले इस नए विधेयक को समाजिक सुधार की एक कड़ी माना जा रहा है. इसके अलावा स्पेन में तलाक प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर भी विचार चल रहा है. स्पेन के प्रधानमंत्री होसे लुईस रोड्रिगेज़ ज़पातेरो जल्द ही इस पर एक विधेयक पेश करने वाले हैं. समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी देने वाले विधेयक पर मतदान से पहले प्रधानमंत्री ज़पातेरो ने विधेयक पास करने की अपील की. उन्होंने अपील करते हुए कहा, "हम इस मामले में पहले देश नहीं हैं. लेकिन मेरा मानना है कि हम आख़िरी देश नहीं होंगे. हमारे बाद इस विषय पर कई देश आगे आएँगे." ज़पातेरो ने कहा कि हमारी कोशिश है सभी को ख़ुश करना- वो चाहे हमारा पड़ोसी हो, हमारा मित्र हो या फिर हमारा सहयोगी. संसद के निचले सदन में इस विधेयक के पारित होने के बाद बाहर मौजूद लोगों ने हर्षध्वनि से इसका स्वागत किया. |
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