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अफ़ग़ानिस्तान को लेकर संयुक्त राष्ट्र चिंतित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि संसदीय चुनाव से पहले हो रही हिंसा से अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा इंतज़ामों पर असर पड़ रहा है. संयक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी जॉन अर्नाल्ट का कहना है कि पूर्व तालेबान प्रशासन के प्रति वफ़ादार विद्रोही हिंसक होते जा रहे हैं. उनकी ये टिप्पणी अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका की नेत़त्व वाली सेना के एक बड़े सैनिक अभियान के ख़त्म होने के बाद आई है. संयुक्त राष्ट्र के दूत ने कहा कि देश के दक्षिणी हिस्सों और पाकिस्तान की सीमा से लगे पश्तून इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक है. अफ़ग़ानिस्तान में सितंबर में संसदीय चुनाव होने हैं. अभियान ख़त्म अर्नाल्ट ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान सरकार को अस्थिरता का दौरा ख़त्म करने के लिए क़दम उठाने चाहिए. अमरीकी और अफ़ग़ान सेना ने शनिवार को दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में एक बड़ा अभियान पूरा किया. इसे पिछले दो सालों का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है. अफ़ग़ान अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान ज़ाबुल प्रांत में 100 से ज़्यादा तालेबान विद्रोही मारे गए. लेकिन तालेबान के प्रमुख नेता अभी भी सेना की ग़िरफ़्त से बाहर हैं. अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के क़रीब 18000 सैनिक तैनात हैं. सर्दियाँ ख़त्म होने के बाद से इस साल यहाँ हुई हिंसक वारदातों में क़रीब 400 लोग मारे जा चुके हैं. |
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