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'अमरीकी सैनिक क्षमता पर दबाव' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेनाओं के प्रमुख जनरल रिचर्ड मायर्स ने कहा है कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में जारी सैनिक कार्रवाई के कारण किसी और युद्ध में शामिल होने की अमरीकी क्षमता पर दबाव पड़ सकता है. जनरल मायर्स ने कहा कि किसी भी अन्य सैनिक कार्रवाई के लिए योजना से ज़्यादा समय लग सकता है. जनरल मायर्स का यह विचार कथित रूप से एक गुप्त रिपोर्ट में दर्ज है जिसे अमरीकी कांग्रेस से पास भेजा गया है. इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में चल रही अमरीकी कार्रवाई में सैनिकों और हथियारों की मांग बहुत ज़्यादा है. अमरीका के शीर्ष सैनिक अधिकारी जनरल मायर्स ने बताया कि अमरीकी सेना अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने में सक्षम है. लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर सेना को किसी और युद्ध के लिए बुलाया गया तो कार्रवाई में सफलता हासिल करने में ज़्यादा समय लग सकता है. इस समय इराक़ में एक लाख 30 हज़ार अमरीकी सैनिक है जबकि अफ़ग़ानिस्तान में 16 हज़ार सैनिक मौजूद हैं. रिपोर्ट जनरल मायर्स का विचार विस्तार से उस गुप्त रिपोर्ट में छपा है जिसे कांग्रेस के पास भेजा गया है. इस रिपोर्ट का कुछ हिस्सा मीडिया में लीक हो गया.
इस रिपोर्ट में कथित रूप से इसका उल्लेख है कि भविष्य में किसी भी सैनिक अभियान में ज़्यादा समय लग सकता है, ज़्यादा सैनिकों की मौत हो सकती है और भारी नुक़सान हो सकता है. बीबीसी के पेंटागन संवाददाता एडम ब्रुक्स के अनुसार सैनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अमरीका की अगली सैनिक कार्रवाई ईरान या फिर कोरियाई प्रायद्वीप में हो सकती है लेकिन इससे सेना पर भारी दबाव पड़ेगा. जनरल मायर्स का यह आकलन ऐसे समय आया है जब अमरीकी कांग्रेस इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में चल रही सैनिक कार्रवाई के लिए 82 अरब डॉलर की राशि मंज़ूर करने पर विचार-विमर्श कर रहा है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसे मंज़ूरी मिल जाएगी. |
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