|
'इराक़ी चरमपंथी पहले की तरह सक्रिय' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेनाओं के प्रमुख जनरल रिचर्ड मायर्स ने कहा है कि इराक़ी चरमपंथियों की हमला करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है. जनरल मायर्स ने कहा कि इराक़ में प्रतिदिन 50 से 60 हमले हो रहे हैं और साल भर पहले भी हमलों का यही स्तर था. उन्होंने कहा कि अभी यह तय करना जल्दबाज़ी होगी कि क्या हाल के दिनों में हमलों में बढ़ोत्तरी किसी अभियान के तहत है. बीबीसी के पेंटागन संवाददाता के अनुसार इराक़ में चुनाव कराए जाने के बाद देखा गया अमरीकी आशावाद ग़ायब हो चुका है. इराक़ में हिंसक अभियान चला रहे चरमपंथियों के बारे में जनरल मायर्स ने कहा, "मैं समझता हूँ उनकी क्षमता पहले जैसी ही बनी हुई है. वे इस समय जिस स्थिति में हैं वो साल भर पहले लगभग वैसी ही थी." जीत उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों में इराक़ में आत्मघाती हमलों में अनेक लोगों की मौत हुई है. चरमपंथियों ने बग़दाद के पास एक असैनिक हेलीकॉप्टर को भी मार गिराया है. हालाँकि जनरल मायर्स ने कहा कि हमलों में बढ़ोत्तरी को चरमपंथियों की सोची-समझी रणनीति बताना जल्दबाज़ी होगी. उन्होंने कहा कि सिर्फ़ हमलों की संख्या के आधार पर चरमपंथी गतिविधियों को आंकना ग़लत होगा. उन्होंने क़रीब 50 प्रतिशत हमलों को विफल बना दिए जाने की भी बात की. जनरल मायर्स ने कहा, "मैं समझता हूँ हम निश्चित तौर पर जीत रहे हैं. कुछ दिनों से हम जीत रहे हैं." इस बीच अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने कहा है कि इराक़ में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में निर्णायक सफलता गठजोड़ सैनिक नहीं दिला सकते. उन्होंने कहा, "चरमपंथियों को पराजित करने वाले लोग ख़ुद इराक़ी लोग होंगे. और वे ऐसा सिर्फ़ सैनिक तरीक़े से नहीं बल्कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रगति करके भी करेंगे." |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||