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इराक़ में सरकार बनाने में नई मुश्किल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी संसद ने नई सरकार में छह मंत्रियों के नामों को मंज़ूरी दे दी है लेकिन उनमें से एक ने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया है. सुन्नी नेता हाशिम अल शिबले को मानवाधिकार मंत्रालय का दायित्व दिया जा रहा था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि उनसे नियुक्ति के बारे में कोई चर्चा नहीं की गई और उनका चुनाव केवल इसलिए हुआ क्योंकि वे सुन्नी हैं. उन्होंने कहा,"केवल समुदाय के ऊपर ध्यान देने से समाज और देश बँटते हैं और इसी कारण से मैंने सम्मानपूर्वक इस पद को स्वीकार करने से मना कर दिया". इससे पहले इराक़ के प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री ने अपनी सरकार में जिन छह मंत्रिपदों पर नियुक्तियाँ कीं जिनमें चार सुन्नी समुदाय के हैं. इसप्रकार इराक़ में नई सरकार में मंत्रिपदों को लेकर कई महीनों से विभिन्न गुटों के बीच जारी बहस ख़त्म हो गई है. प्रधानमंत्री जाफ़री ने अपनी सरकार में एक पद को छोड़ 35 मंत्रियों के नामों की सूची जारी कर दी थी. इस सूची में से अब एक मंत्री ने पद ग्रहण करने से इनकार कर दिया है. वहीं संभावना है कि उपप्रधानमंत्री का एक पद रिक्त है जिसपर किसी महिला को नियुक्त किया जाएगा. रक्षा मंत्री का महत्वपूर्ण पद सुन्नी राजनेता सादौन अल दुलैमी को दिया गया है जो बग़दाद के पश्चिम स्थित एक स्थान से आते हैं जिसे चरमपंथियों का एक प्रमुख गढ़ समझा जाता है. इराक़ में नई सरकार में शामिल किए जानेवाले मंत्रियों के नामों की सूची आठ दिन पहले जारी की गई थी जिसके बाद से इराक़ में चरमपंथी हमलों में नाटकीय रूप से तेज़ी आई थी. इराक़ में अप्रैल में सरकार गठित होने के बाद से अभी तक हिंसा की विभिन्न घटनाओं में लगभग 250 लोगों की जान जा चुकी है. |
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