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इराक़ में कैबिनेट को मंज़ूरी मिली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी संसद की बैठक में कैबिनेट सदस्यों के नामों को आंशिक रूप से मंजूरी दे दी गई है. कुछ ऐहम मंत्रालयों पर अब भी सहमति नहीं हो पाई है जिनमें तेल और रक्षा मंत्रालय शामिल हैं. मनोनीत प्रधानमंत्री इब्राहिम जाफ़री ने बुधवार को मंत्रियों की सूची सौंप दी थी. इराक़ में कई हफ्तों की बातचीत और रस्साकशी के बाद मनोनीत प्रधानमंत्री इब्राहिम जाफ़री ने कैबिनेट का गठन कर लिया है. गुरुवार को संसद की बैठक हुई जहाँ जाफ़री ने अपने कैबिनेट के सदस्यों के नाम रखे और संसद की सहमति प्राप्त की. जाफ़री के कैबिनेट में 36 सदस्य हैं. इसके लिए शिया गठबंधन को सामान्य बहुमत की दरकार है जो कुर्द दलों के बिना भी मिल सकती है. हालांकि यह देखना होगा कि सरकार का स्वागत कैसे होता है और आम जनता समेत नेताओं की क्या प्रतिक्रिया होती है. सरकार के गठन का रास्ता आगे अभी और पेचीदा होने वाला है जब सुन्नी समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर वार्ताएं होनी है. अभी तक उन लोगों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं जिन्हें कैबिनेट में शामिल किया जा रहा है . वार्ताओं में शामिल सुन्नी गुटों का कहना है कि उनकी मांगें नहीं मानी गई हैं. अगर सुन्नी समूह सरकार को पूरा समर्थन नहीं देते हैं तो सरकार के लिए काफ़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं क्योंकि इराक़ में चल रही अधिकतर चरमपंथी गतिविधियां सुन्नी गुटों के ज़रिए हो रही है. जाफरी ने कहा है कि उनकी सरकार के एजेंडे में सबसे पहला काम सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा. कैबिनेट के गठन में अत्यधिक देरी हुई है और इसी दौरान हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी हुई. कुछ प्रेक्षक मानते हैं सरकार के गठन में देरी के कारण हिंसा बढ़ रही है. बुधवार को भी चरमपंथियों ने एक महिला सांसद लामिया ख़दूरी को उनके घर में ही गोली मार दी थी. |
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