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इराक़ में मंत्री पदों पर सहमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री ने कहा है कि रिक्त पड़े सात मंत्री पदों में से एक को छोड़कर सभी के लिए सहमति हो गई है. आम चुनाव के तीन महीने बाद आख़िरकार प्रधानमंत्री इब्राहिम अल जाफ़री ने अपनी सरकार का गठन लगभग पूरा कर लिया है. उन्होंने कहा है कि अब संसद में उनके पूर्ण कैबिनेट पर रविवार को मतदान होगा. सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर सहमति न होने के कारण कैबिनेट के गठन में देरी हुई. लेकिन अब रक्षा और तेल मंत्रियों के नाम पर सहमति हो गई है. उम्मीद है कि इराक़ी रक्षा मंत्रालय के प्रमुख होंगे सैदोन अल दुलैमी, जो सुन्नी मुसलमान हैं. संभावना है कि तेल मंत्रालय की ज़िम्मेदारी संभालेंगे इब्राहीम बहर अल उलूम, जो एक प्रमुख शिया मौलवी के बेटे हैं. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि रक्षा मंत्रालय एक सुन्नी मुसलमान को देना सुन्नी समुदाय का समर्थन हासिल करने की कोशिश है. घोषणा प्रधानमंत्री अल जाफ़री ने कहा कि पाँच नए मंत्रियों और उप प्रधानमंत्री के नाम पर सहमति हो गई है. रविवार को संसद की मंज़ूरी मिलने के बाद इनके नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी.
हालाँकि अभी भी उप प्रधानमंत्री के पद पर महिला की नियुक्ति को लेकर आख़िरी दौर में विचार-विमर्श चल रहा है. कैबिनेट में महिलाओं की संख्या कम है. ख़ासकर शिया समुदाय के 18 मंत्रियों में सिर्फ़ एक ही महिला है. इराक़ियों का मानना है कि एक बार सरकार का गठन पूरा हो जाने के बाद सरकार अपना ध्यान सुरक्षा स्थिति पर देगी. आठ दिन पहले अपूर्ण कैबिनेट की घोषणा के बाद से हिंसा की घटनाओं में एकाएक तेज़ी आ गई है. जिनमें तीन सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है. कैबिनेट के गठन में सबसे ज़्यादा विवाद था रक्षा मंत्री के पद को लेकर. दरअसल यह पद सुन्नी मुसलमान के खाते में था. लेकिन कई उम्मीदवारों के नाम पर इसलिए सहमति नहीं हो पाई क्योंकि कहा गया कि उनका संबंध सद्दाम हुसैन के शासनकाल से था. |
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