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बुधवार, 27 अप्रैल, 2005 को 18:18 GMT तक के समाचार
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जाफ़री:एक डॉक्टर और राजनीतिज्ञ
इब्राहीम जाफ़री
इराक़ के नए प्रधानमंत्री इब्राहीम जाफ़री हाल के दिनों तक देश के बाहर एक अनजान व्यक्ति थे.

58 वर्षीय इब्राहीम जाफ़री पेशे से डॉक्टर हैं और इस्लामी पार्टी के प्रवक्ता थे. जनवरी में हुए चुनाव के बाद जाफ़री एक ताक़तवर नेता के रूप में उभरकर सामने आए और प्रधानमंत्री के लिए भी एक पसंदीदा नाम बन गए.

तीन सदस्यों वाली राष्ट्रपतिय परिषद ने जैसे ही शपथ ग्रहण की, तो प्रधानमंत्री के लिए इब्राहीम जाफ़री के नाम का समर्थन किया.

इस्लामी दावा पार्टी इराक़ में पुराने शिया आंदोलनों में से एक है और उसने 1970 के दौर में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ लड़ाई की थी जिसमें काफ़ी ख़ून-ख़राबा भी हुआ था.

वह विद्रोह जब दबा दिया गया तो इब्राहीम जाफ़री ईरान में जाकर छुप गए और उसके बाद ब्रिटेन पहुँचे.

सद्दाम हुसैन के पतन के बाद दावा पार्टी ने इराक़ के दक्षिणी हिस्सों में ख़ुद को बहुत जल्दी स्थापित कर लिया. ग़ौरतलब है इराक़ के दक्षिणी इलाक़ों में शिया बहुमत में रहते हैं.

इब्राहीम जाफ़री को इराक़ की एकता का प्रतीक माना जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि सुन्नी अरब लोगों को भी लोकतंत्र की मुख्यधारा में लाने में उनकी अपील कारगर साबित होगी.

ग़ौरतलब है कि सुन्नी अरब लोगों ने बहुत से इलाक़ों में चुनाव का बहिष्कार किया था.

इब्राहीम जाफ़री कुर्दों की स्वायत्तता की माँग को भी देश की अखंडता को प्रभावित किए बिना ही संतुष्ट करने के लिए काम करना होगा.

धर्म और सरकार

इब्राहीम जाफ़री के अतीत से अभी यह स्पष्ट नहीं होता कि धार्मिक क़ानून और इराक़ में धर्म की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी क्या राय है.

इब्राहीम जाफ़री

चुनावों से पहले ही इब्राहीम जाफ़री ने कहा था कि जीत हासिल करने वाले नेता शियाओं के रूप में शासन नहीं करेंगे बल्कि वे इराक़ियों के रूप में सरकार चलाएंगे जिसमें अन्य समुदायों को अलग नहीं रखा जाएगा.

इब्राहीम जाफ़री किसी भी क़ानून का स्रोत धर्म को ही मानने के अभियान में अग्रणी रहे हैं और जब इराक़ की अंतरिम सरकार बुनियादी क़ानून बना रही थी तो उन्होंने इस पक्ष की ज़ोरदार हिमायत की थी.

ऐसा नहीं लगता कि इब्राहीम जाफ़री कुछ ऐसे कट्टरपंथी मुस्लिम देशों का अनुसरण करेंगे जहाँ महिलाओं को कार चलाने, मतदान या पुरुषों वाले क्षेत्रों में कामकाज करने की इजाज़त नहीं होती.

लेकिन इब्राहीम जाफ़री के कुछ आलोचक कहते हैं कि वह ईरान की कट्टरपंथी धारा के नज़दीक रहे हैं और डर भी जताते हैं कि वह इराक़ में सरकारी व्यवस्था में भी इसी धारा को आगे बढ़ा सकते हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि इब्राहीम जाफ़री का मृदुभाषी होना भी शायद उन लोगों को राज़ी नहीं कर सके जो अमरीका के नियुक्त किए हुए शासकों को 'बाहरी लोग' समझते हैं.

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