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फ़लस्तीनी संगठन युद्धविराम पर राज़ी हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट इसराइल के साथ अपना सशर्त संघर्षविराम इस साल के अंत तक जारी रखने पर सहमत हो गए हैं. मिस्र की राजधानी काहिरा में फ़लस्तीनी गुटों की बैठक में इसराइल के साथ सशर्त संघर्ष विराम की घोषणा की गई है. इन गुटों में चरमपंथी गुट हमास और इस्लामिक जिहाद जैसे संगठन भी शामिल हैं और उनका कहना है कि वे शांति का ये दौर जारी रखने को तैयार हैं मगर इसके बदले इसराइल को हमले रोकने और बंदियों को रिहा करने की अपनी प्रतिबद्धता पर क़ायम रहना होगा. इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से फ़ोन पर बातचीत में कहा कि काहिरा में जो तय हुआ है वह एक सकारात्मक कदम है. बीबीसी संवाददाता रोज़र हार्डी का कहना है कि यह एक सशर्त समझौता है और इसकी भाषा भी काफ़ी नपीतुली है जिसमें ‘संघर्षविराम’ शब्द से बड़ी सावधानीपूर्वक बचा गया है लेकिन इससे महमूद अब्बास को कम से कम उतना तो मिल ही गया है जिसकी उन्हें ज़रूरत है. इसराइल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क रीगेव ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा, "जी हाँ, यह एक सकारात्मक क़दम है. हमें शांति मिलेगी, उन्होंने हमसे शांति का वादा किया है, कोई हत्या नहीं होगी, कोई आतंकवादी कार्रवाई नहीं होगी." "हम इस समझौते के पक्ष में हैं और हम इसे जारी रखने के हिमायती हैं. चार साल तक हमारे शहरों में, सड़कों पर बम हमलों के बाद इस वक़्त इस समझौते के लिए हम उनके शुक्रगुज़ार हैं. हम चाहते हैं कि यह शांति बनी रहे और किसी भी वजह से इस शांति पर असर नहीं पड़ना चाहिए." इसराइली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क रीगेव ने यह भी कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि हम इसके लिए शुक्रगुज़ार हैं लेकिन सिर्फ़ इतना भर काफ़ी नहीं है. उन्होंने कहा कि आज ऐसा माहौल है जिसमें हमास और इस्लामिक जेहाद जैसे संगठनों के पास बहुत से हथियार हैं और वे हमेशा तैयार अवस्था में रहते हैं. "और चूँकि इसराइल उनके ख़िलाफ़ कोई अभियान नहीं चला रहा है तो ऐसे में हथियारों का ज़ख़ीरा बढ़ाने के लिए इस मौक़े का फ़ायदा उठा सकते हैं." उधर फ़लस्तीनी चरमपंथी गुटों ने कहा है कि इस दिशा में प्रगति तभी हो सकती है यदि इसराइल फ़लस्तीन अधिकारियों को निशाना बनाना बंद करता है और जेल में क़ैद हज़ारों फ़लस्तीनियों को रिहा करता है. मध्य पूर्व में कोई भी इस बारे में आशवस्त नहीं है कि वहाँ कोई शांति प्रक्रिया चल भी रही है या नहीं लेकिन इतना तो साफ़ कि बीते कुछ सप्ताहों में शांति प्रक्रिया को बहाल करने के लिए कुछ क़दम ज़रूर उठाए गए हैं. और अगर पिछले क़रीब साढ़े चार साल के दौरान हुई हिंसा और राजनीतिक ठहराव से तुलना करें तो इन क़दमों को प्रगति ज़रूर कहा जाएगा. लेकिन अगर वास्तविक शांति प्रक्रिया की तरफ़ बढ़ना है तो महमूद अब्बास को दिखाना होगा कि उदारवादी रुख़ से बदलाव ज़रूर होता है. इस सिलसिले में उनकी ज़रूरत है कि इसराइल पश्चिमी तट के कुछ और इलाक़ों से हटे. इसराइल को कुछ और फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा करना हो और पश्चिमी तट में इमारती गतिविधियों को रोकना होगा. |
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