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शेरॉन और अब्बास के बीच महत्वपूर्ण बातचीत आज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन और फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास आज मिस्र में बातचीत करेंगे. चार साल पहले इसराइल के ख़िलाफ़ इंतिफ़ादा शुरू होने के बाद पहली बार ऐसी उच्च स्तरीय बैठक हो रही है. दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि शर्म-अल-शेख़ में होने वाली बातचीत के बाद संघर्ष विराम पर घोषणा हो सकती है. इस शिखर सम्मेलन में मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक और जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला भी शामिल होंगे. फ़लस्तीनी राष्ट्रपति के रूप में महमूद अब्बास के चुनाव और अमरीका के राष्ट्रपति के रूप में जॉर्ज बुश के दोबारा चुने जाने के बाद मध्य पूर्व में शांति वार्ता एक बार फिर ज़ोर पकड़ रही है. उम्मीद अमरीका की नई विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने सोमवार को फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास से मुलाक़ात की. इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से वे पहले ही मिल चुकीं हैं. शर्म-अल-शेख़ से बीबीसी संवाददाता हेबा सालेह का कहना है कि शिखर सम्मेलन में कोशिश यही है कि किसी तरह इसराइल और फ़लस्तीन को एक बार फिर से बातचीत के लिए राज़ी किया जाए.
इसके अलावा सुरक्षा का मुद्दा भी शिखर सम्मेलन में उठने की उम्मीद है. दोनों ओर के अधिकारियों का मानना है कि बातचीत के लिए संघर्ष विराम की घोषणा हो सकती है. अभी तक महमूद अब्बास फ़लस्तीनी चरमपंथी गुटों पर काफ़ी हद तक रोक लगाने में सफल हुए हैं लेकिन चरमपंथी गुटों का सहयोग इस बात पर निर्भर करेगा कि इसराइल संघर्ष विराम प्रस्ताव में क्या पेश कर रहा है. वैसे इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास की इस बात के लिए प्रशंसा की है कि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए क़दम उठाए हैं. इसराइल भी फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा करके और पश्चिमी तट के पाँच शहरों से हटने की घोषणा करके इसका सकारात्मक जवाब दे रहा है. शर्म अल शेख़ शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे नेताओं का कहना है कि इसराइल और फ़लस्तीन के बीच शांति स्थापित करने का एक बढ़िया मौक़ा आया है जिसे हाथ से जाने नहीं देना चाहिए. अमरीका ने भी संकेत दिया है कि इस बार वह मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर है. |
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