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मध्यपूर्व में शांति का ऐलान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास और इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने मध्यपूर्व में चार दशक से जारी हिंसा के ख़ात्मे के लिए शांति समझौते की घोषणा की है. अब्बास ने कहा कि युद्धविराम, जो तत्काल लागू हो रहा है, शांति और उम्मीद के एक नए युग का परिचायक है. उधर, शेरॉन ने संकल्प ज़ाहिर किया कि यदि हिंसा रुकती है तो वह फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई रोक देंगे. यह ऐलान मिस्र में बातचीत के दौरान किया गया. वर्ष 2000 में जब से फ़लस्तीनी इंतफ़ादा की शुरुआत हुई है, यह सबसे उच्चस्तरीय बातचीत थी. बीबीसी संवाददाता हेबा सालेह का कहना है कि लगता है महमूद अब्बास ने फ़लस्तीनी ख़ेमों से अनौपचारिक तौर पर शांति का आश्वासन हासिल कर लिया है. लेकिन उनका कहना है कि चरमपंथियों का पूरा सहयोग इस बात पर निर्भर करता है इसराइल किस तरह की पेशकश करेगा. मिस्र में जारी बातचीत में वहाँ के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक और जोर्डन के शाह अब्दुल्लाह भी हिस्सा ले रहे हैं. मध्य पूर्व में शांति का रास्ता अभी भी बाधाओं से भरा हुआ माना जा सकता है लेकिन शर्म अल शेख़ में जुटे नेताओं ने उम्मीद का संदेश देने की पूरी कोशिश की है. सभी नेताओं के भाषणों में शांति के नए मौकों का हवाला था और साथ ही थी नए युग के शुरुआत की उम्मीद भी. लेकिन इन सभी उम्मीदों को पूरा होने की पहली शर्त यही थी कि दोनों देश यानी इसराइल और फ़लस्तीनी हिंसा ख़त्म करने पर राज़ी हों. और ऐसा ही हुआ. सम्मेलन में आशाओं और आकांक्षाओं का जो माहौल बना उसे और खुशगवार किया मिस्र और जार्डन के नेताओं ने जिन्होंने इसराइल में चार साल बाद अपने राजनयिकों को भेजने की घोषणा कर दी. लेकिन सबकुछ इतना सुंदर नहीं रहा है . फ़लस्तीन के मुख्य चरमपंथी गुट हमास और इस्लामिक जेहाद का कहना है वे अब्बास और इसराइली नेतृत्व के बीच हुए इस समझौते से बाध्य नहीं हैं. हमास के वरिष्ठ नेताओं में से एक हसन युसुफ ने कहा " हम ऐसी बैठकों और बयानों पर विश्वास नहीं करते. ख़ास कर इसराइली पक्ष के बयानों का. हम सिर्फ बातें नहीं चाहते. हम चाहते हैं कि ज़मीन पर कार्रवाई हो जिससे इन बयानों की सार्थकता जानी जा सके. सिर्फ बड़ी बड़ी बातों का भुलावा हमें न दिया जाए." हमास का कहना था कि ऐसे किसी भी बयान से पहले उनसे सलाह मशविरा किया जाना चाहिए था. हमास की प्रतिक्रिया भले की कड़ी दिखती हो लेकिन पिछले कुछ दिनों से हमास और अन्य चरमपंथी संगठनों ने शांति बनाए रखी है. आने वाले दिनों में भी चरमपंथी हमलों की संभावना कम जताई जा रही है. इन टिप्पणियों के बीच इसराइली विदेश मंत्रालय का भी बयान आया है जिसमें कहा गया है कि चरमपंथी संगठनों पर अंकुश लगना चाहिए. इसराइली विदेश मंत्रालय के अधिकारी मार्क रेगेव ने कहा " नए फ़लस्तीनी नेतृत्व को कुछ कठिन फैसले लेने होंगे जो पहले के नेतृत्व ने नहीं लिए. हमास और इस्लामिक जेहाद जैसे गुटों से उन्हें निपटना होगा. यह बहुत ज़रुरी है कि उन्हें न केवल लोगों का समर्थन हो बल्कि पूरी अरब दुनिया का भी समर्थन मिले. " पिछले चार सालों में मध्य पूर्व में हुई हिंसा का ख़ामियाजा भुगतना पड़ता है आम जनता को. दोनों पक्षों के बीच मंगलवार को हुए समझौते के बारे में आम लोगों की राय मिली जुली है. कुछ लोगों को इससे बड़ी उम्मीद है लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि इससे बेहतर भी बहुत कुछ हो सकता था. इंतफ़ादा का अंत टेलीविज़न पर दिखाए गए चित्रों में महमूद अब्बास और अरियल शेरॉन को बातचीत की मेज़ के आरपार से हाथ मिलाते हुए और मुस्कराते हुए देखा जा सकता है. इसराइली प्रवक्ता रानन गिस्सिन ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि फ़लस्तीनी जल्दी ही इंतफ़ादा की समाप्ति का ऐलान कर देंगे. |
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