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मंगलवार, 29 जून, 2004 को 16:31 GMT तक के समाचार
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'मध्य पूर्व में आज़ादी ही भविष्य'
बुश और शिराक
मध्य पूर्व को लेकर दोनों में ख़ासे मतभेद हैं
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए अपना दृष्टिकोण-पत्र जारी करते हुए कहा है कि स्वतंत्रता ही मध्य पूर्व के देशों का भविष्य है.

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन नैटो के इस्तांबुल में हुए सम्मेलन के समापन के दिन बुश ने यह संदेश सुनाया है.

बुश ने यह मध्य पूर्व के देशों में लोकतंत्र स्थापना का यह संदेश एक बहुत ही महत्वूर्ण स्थान से दिया.

जॉर्ज बुश ने तुर्की के इंस्ताबुल शहर में एक मस्जिद के सामने एक छोटी सी जल पट्टी से यह संदेश दिया. यह जल पट्टी परंपरागत रूप से यूरोप और एशिया के बीच विभाजक रेखा मानी जाती है.

बुश ने कहा, "पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्वतंत्रता ही भविष्य है और इसमें तुर्की को एक आदर्श माना जाना चाहिए."

'तुर्की उदाहरण बने'

बुश ने तुर्की को एक मज़बूत धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश क़रार दिया.

बुश ने कई बार पहले कह चुके अपने वाक्य दोहराए कि इस्लाम और लोकतंत्र में सहअस्तित्व नहीं है और मुस्लिम देशों को पश्चिमी देशों को व्यावसायीकरण से घबराना नहीं चाहिए.

बुश ने यूरोपीय संघ से एक बार फिर अनुरोध किया कि वह तुर्की को अपना सदस्य बनाने के लिए बातचीत शुरू करे.

तुर्की में बुश का विरोध
छात्रों ने बुश का विरोध किया है
बुश के इस बयान से फ्रांस के राष्ट्रपति ख़ासे परेशान हो सकते हैं क्योंकि वह बुश को यूरोपीय संघ के मामलों से दूर ही रहने की सलाह दे चुके हैं.

लेकिन बुश ने अपनी नैतिक दलीलें देते हुए कहा है, "इतिहास ने हमें जो काम दिया है उसे हम पूरा करके ही रहेंगे."

बीबीसी संवाददाता मैट फ्रेई का कहना है कि तुर्की बुश के इस दृष्टिकोण की एक तरह से धुरी है क्योंकि बुश प्रशासन में बहुत से लोग ख़ासतौर से नव परंपरावादी आदर्शवादियों का सोचना है कि इराक़ भी तुर्की की ही तरह एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश बनेगा.

लेकिन बीबीसी संवाददाता का यह भी कहना है कि तुर्की में यह संदेश बेशक लोकप्रिय हो सकता है मगर संदेश देने वाला तो क़तई भी लोकप्रिय नहीं है.

बुश के तुर्की दौरे का बड़े पैमाने पर विरोध भी होता रहा है और ख़ासतौर से छात्र समुदाय ने बड़े प्रदर्शन किए हैं. और ऐसा एक बार भी नहीं हुआ कि बुश के भाषण के दौरान तालियाँ बजी हों.

यहाँ तक भाषण समाप्त होने पर भी ख़ामोशी छाई रही.

हालाँकि इसमें कम ही शक होना चाहिए कि बुश का यह दृष्टिकोण महज़ शब्दों से आगे की बात है और इराक़ में डेड़ लाख से ज़्यादा अमरीकी सेनाओं की मौजूदगी इसका एक सबूत भी है.

लेकिन यह भी सच है कि बुश के इन शब्दों पर कितना अमल किया जाता है और ये शब्द कितने कारगर होंगे, यह इस पर निर्भर करेगा कि इराक़ियों की अमरीका के बारे में क्या राय बनती है.

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