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क्या आरोप लगेंगे सद्दाम के ख़िलाफ़? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पिछले छह महीनों से अमरीकी हिरासत में थे और अब उन्हें इराक़ी हिरासत में सौंपा जा रहा है. उनके ख़िलाफ़ मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है, संभावना व्यक्त की जा रही है कि उन पर युद्ध अपराध सहित अनेक अभियोग लगाए जाएँगे. इराक़-ईरान युद्ध इराक़ ने सीमा पर हुई कई झड़पों के बाद 1980 में ईरान पर हमला कर दिया. इस लड़ाई में दोनों तरफ़ से लगभग दस लाख लोग मारे गए थे. ईरान की सरकार सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ एक आरोपपत्र तैयार कर रही है, उसका कहना है कि लड़ाई के दौरान इराक़ की ओर से कई युद्धअपराध किए गए. ईरान की माँग है कि सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चलाया जाए, कुछ ईरानियों का यह भी कहना है कि अमरीका के विरूद्ध भी मुक़दमा चलना चाहिए क्योंकि उसने तब सद्दाम का साथ दिया था. इस लड़ाई में इराक़ ने ईरानी सैनिकों के ऊपर जैविक-रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया था जिसमें कम से कम 20 हज़ार ईरानी सैनिक मारे गए थे, ईरान इसे युद्ध अपराध मानता है और सद्दाम को इसकी सज़ा दिलाना चाहता है. कुर्दों पर अत्याचार इराक़ के उत्तरी हिस्से में बसने वाले कुर्दों ने 1988 में जब स्वायत्तता की माँग शुरू की तो इराक़ी सैनिकों ने उनके ऊपर हमला बोल दिया.
इराक़ी सैनिकों ने कुर्द बहुल नगर हलाब्जा पर रासायनिक गैसों का हमला कर दिया जिसमें पाँच हज़ार से अधिक आम नागरिक मारे गए थे. आरोप है कि 1988 में ही कुर्दों की माँग को बंद कराने के लिए इराक़ी सैनिकों ने आठ महीने के अपने अभियान में लगभग एक लाख नौजवानों कुर्दों को मौत के घाट के उतार दिया. कुर्दों पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल जनरल अली हसन अल माजिद ने किया था जिन्हें केमिकल अली के नाम से जाना जाता था और वे सद्दाम के चचेरे भाई थे. कुवैत पर हमला सद्दाम हुसैन ने 1990 में इराक़ी सैनिकों को कुवैत पर धावा बोलने का आदेश दिया जिसके परिणामस्वरूप 1991 में खाड़ी युद्ध की शुरूआत हुई.
आरोप हैं कि इराक़ी सैनिकों ने बड़ी संख्या में कुवैत से पकड़े गए अपने युद्धबंदियों को लौटते समय रास्ते में बेरहमी से मार डाला. इराक़ी सैनिकों ने कुवैती तेल के कुओं में आग लगा दी और तेल के पाइपलाइनों को भारी क्षति पहुँचाई, उन्होंने पाइपलाइनों को जान-बूझकर खोल दिया जिससे पर्यावरण को भारी नुक़सान हुआ. खाड़ी युद्ध के अंतिम दौर में विद्रोह करने वाले शिया नौजवानों की बड़ी संख्या में हत्या करके उन्हें सामूहिक कब्रों में दफ़न कर देने की घटना भी सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ आरोपों में शामिल होगी. इसराइल पर मिसाइल हमले इसराइल का कहना है कि वह सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाना चाहता है क्योंकि उन्होंने खाड़ी युद्ध के दौरान इसराइल पर स्कड मिसाइलें छोड़ी थीं. इसराइल सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ फ़लस्तीनी आत्मघाती चरमपंथियों को आर्थिक सहायता देने का आरोप भी लगाता है. इराक़ ने इसराइल पर 39 मिसाइलें दागीं थीं जिससे जान-माल का भारी नुक़सान हुआ था. इसराइल के न्याय मंत्री ने कहा है कि अगर सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुकदमा शुरू हुआ तो उनका देश पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ गवाही देगा. हत्या, अत्याचार और प्रताड़ना जाँच अधिकारियों का कहना है कि इराक़ में लगभग 270 सामूहिक कब्रें हैं जिनमें हज़ारों-हज़ार लोग दफ़न हैं.
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने 2001 में इराक़ में सुनियोजित तरीक़े से हज़ारों लोगों को प्रताड़ित करने के सवाल पर इराक़ सरकार की कड़ी आलोचना की. इराक़ में 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति का समर्थन करने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए हज़ारों शिया लोग आज भी लापता हैं. इराक़ में रहने वाले एक अरब कबीले को तबाह करने के लिए सद्दाम हुसैन के सैनिकों ने पानी वाले एक कछार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया, पानी के ख़राब होने से पिछले पाँच हज़ार से वहाँ रह रहे लोगों का जीवन असंभव हो गया. सद्दाम हुसैन ने जब सत्ता संभाली थी तब भी बड़ी संख्या में राजनीतिक विरोधियों को मौत की सज़ा दी गई थी और बहुत सारे लोगों को बिना मुकदमा चलाए मार डाला गया था. कुल मिलाकर, सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ दाख़िल किया जाने वाले आरोपपत्र काफ़ी लंबा-चौड़ा होगा और कई मामलों में उनके ख़िलाफ़ ठोस सबूत भी हैं. |
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