|
अब्बास की फ़लस्तीनी गुटों से बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास मंगलवार को काहिरा में प्रमुख फ़लस्तीनी गुटों से बातचीत करेंगे. इस बातचीत का मकसद मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और हमास जैसे चरमपंथी गुटों को इसराइल के साथ स्थायी संघर्षविराम पर सहमत करना है. फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने इस बारे में आशा भी व्यक्त की है. उधर इसराइल का कहना है कि वह बुधवार को पश्चिमी तट के जैरिको नगर का नियंत्रण फ़लस्तीनी अधिकारियों को सौंप देगा. दोनो तरफ़ के मत्रिमंडल के दो सदस्यों के बीच हुई बातचीत के बाद ये तय हुआ है. चर्चा के मुद्दे बीबीसी संवाददाता एलन जॉनस्टन का कहना है कि अब फ़लस्तीनी नेता अब्बास और इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के बीच बातचीत और संघर्षविराम पर हुई सहमति को एक महीना हो गया है. ये शांति प्रक्रिया को दोबारा शुरु करने के लिए अहम कदम माना जा रहा था. लेकिन फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास और अन्य गुटों ने इसकी पुष्टि करने से साफ़ इनकार कर दिया था. बीबीसी संवाददाता के अनुसार अब महमूद अब्बास के साथ ताज़ा बातचीत में चरमपंथी गुटों का स्थायी संघर्षविराम के लिए सहमत होना तो मुश्किल है लेकिन वे अनौपचारिक संघर्षविराम जारी रखने पर सहमत हो सकते हैं. बीबीसी संवाददाता के अनुसार चरमपंथी गुटों का मानना है कि इसराइल ने ऐसे कदम नहीं उठाए हैं कि स्थायी संघर्षविराम किया जाए. फ़लस्तीनी मानते हैं कि इसराइल ने कब्ज़े वाले क्षेत्रों में सैनिक नियंत्रण में वादे के अनुसार ढील नहीं दी है. लेकिन काहिरा में हो रही बैठक में संघर्षविराम के अलावा फ़लस्तीनी राजनीति से संबंधित अन्य मुद्दे भी आएँगे. हमास जैसे संगठन फ़लस्तीनी प्रशासन में फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में अपना दख़ल चाहते हैं. साथ ही इसराइल के गज़ा से हट जाने के बाद वहाँ प्रशासन चलाने पर भी चर्चा होगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||