|
फ़लस्तीनी मंत्रिमंडल को संसदीय मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी संसद ने कई दिन की बहस के बाद नए मंत्रिमंडल को मंज़ूरी दे दी है. नए मंत्रिमंडल के ज़्यादातर सदस्य सुधारवादी और तकनीकी विशेषज्ञ हैं जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त समझा जा रहा है. ग़ौरतलब है कि इससे पहले के फ़लस्तीनी प्रशासन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे. प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने नए मंत्रिमंडल के लिए एक दिन पहले फ़तह संगठन का समर्थन हासिल कर लिया था. पिछले कुछ दिनों से इस पर गतिरोध बना हुआ था. फ़तह संगठन ने प्रधानमंत्री क़ुरई की पिछली सूची पर आपत्ति जताई थी जिसमें यासिर अराफ़ात के पुराने सहयोगियों को जगह दी गई थी. फ़तह ने प्रधानमंत्री क़ुरई से अनुरोध किया था कि वे यासिर अराफ़ात के नज़दीकी लोगों को मंत्रिमंडल में स्थान न दें. इनकी छवि भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों के रूप में है. फ़तह ने मांग की थी कि मंत्रिमंडल में पेशेवर और तकनीकी विशेषज्ञों को स्थान दिया जाए जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप न हों. पूर्व विदेश मंत्री नबील साद यासिर अराफ़ात के निकट सहयोगियों में से ऐसे प्रमुख नेता हैं जिन्हें नए मंत्रिमंडल में स्थान मिला है. उन्हें उप प्रधानमंत्री बनाया जा रहा है. मुख्य फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एराकात ने बीबीसी को बताया कि नया मंत्रिमंडल फ़लस्तीनियों के लिए आगे बढ़ने का एक रास्ता है. इसराइल के विदेश मंत्री सिलवान शैलॉम ने नए मंत्रिमंडल को एक सकारात्मक क़दम क़रार दिया है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||