|
फ़लस्तीनी नेता नए मंत्रिमंडल पर सहमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने नए मंत्रिमंडल के लिए फ़तह संगठन का समर्थन हासिल कर लिया है. पिछले कुछ दिनों से इस पर गतिरोध बना हुआ था. फ़तह संगठन ने प्रधानमंत्री क़ुरई की पिछली सूची पर आपत्ति जताई थी जिसमें यासिर अराफ़ात के पुराने सहयोगियों को जगह दी गई थी. फ़तह ने प्रधानमंत्री क़ुरई से अनुरोध किया था कि वे यासिर अराफ़ात के नज़दीकी लोगों को मंत्रिमंडल में स्थान न दें. इनकी छवि भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों के रूप में है. फ़तह ने मांग की थी कि मंत्रिमंडल में पेशेवर और तकनीकी विशेषज्ञों को स्थान दिया जाए जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप न हों. मंत्रिमंडल की यह सूची काफ़ी लंबी बहस के बाद तैयार की गई जिसमें काफ़ी फेरबदल भी किए गए हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि अधिकतर पुराने मंत्रियों को हटा दिया जाएगा. नए चेहरे फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के एक नज़दीकी सहयोगी ने बीबीसी को बताया कि पुराने लोगों में केवल नबील शाद को उपप्रधानमंत्री के रूप में स्थान दिया जा रहा है. इस मंत्रिमंडल में जो नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं उनमें सबसे प्रमुख हैं नासिर यूसुफ़. उन्हें आंतरिक सुरक्षा का मंत्री बनाया जा सकता है और वह सुरक्षा बलों के भी प्रभारी रहेंगे. संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी प्रतिनिधि नासिर अल क़िदवा को विदेश मंत्री बनाया जा सकता है. आलोचकों का कहना है कि यासिर अराफ़ात ने मंत्रिमंडल में नेताओं को उनके संपर्कों के आधार पर स्थान दिया था न कि उनकी योग्यता के आधार पर. हालांकि नए फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास इस विवाद से दूर रहे हैं. लेकिन बुधवार को उन्होंने फ़तह संगठन के लोगों से मुलाक़ात की और प्रधानमंत्री क़ुरई की सूची को समर्थन देने का अनुरोध किया. मंत्रिमंडल को संसद से मंज़ूरी की आवश्यकता होती है जिसमें दो तिहाई सदस्य फ़तह संगठन के हैं. दूसरा प्रमुख ग्रुप हमास है पर उसने संसद का बहिष्कार कर रखा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||