| ईरान आतंकवाद को समर्थन बंद करे: बुश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ईरान से 'आतंकवाद को समर्थन' बंद करने की अपील करते हुए परमाणु हथियारों के विकास से भी दूर रहने के लिए कहा है. यूरोप के दौरे पर निकले राष्ट्रपति बुश ने अमरीका और यूरोप के बीच संबंधों के नए युग का आह्वान करते हुए इस संबंध को नई सदी में अपनी सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ भी बताया है. यूरोपीय संघ और नैटो के मुख्यालय ब्रसेल्स में उन्होंने ये भाषण दिया. उन्होंने मध्य पूर्व में शांति लाने को भी अपना प्रमुख लक्ष्य बताया. राष्ट्रपति बुश के भाषण का मुख्य उद्देश्य था यूरोप के लोगों को दुनिया के बारे में अपनी धारणा या अपने विचारों का आधार समझाना. साथ ही लोगों को ये दिखाना कि पूरे मध्य पूर्व में लोकतंत्र का प्रचार प्रसार उनकी दृष्टि में इतना प्रमुख क्यों है. उन्होंने ईरान का ज़िक्र करते हुए कहा, "स्वतंत्र दुनिया का ईरान में साझा लक्ष्य है. शांति के लिए ईरानी सत्ता को आतंकवाद को अपना समर्थन बंद कर देना चाहिए और परमाणु हथियार भी नहीं बनाने चाहिए." उन्होंने ईरान को इराक़ से अलग बताते हुए कहा, "ईरान का मामला इराक़ से अलग है क्योंकि अभी हम कूटनीति के शुरुआती चरणों में हैं मगर इस तरीक़े का नतीजा अब ईरान पर निर्भर है." ज़ोरदार स्वागत उनका भाषण यूँ तो उनकी पुरानी लीक पर ही था मगर उसमें कुछ व्यावहारिक उदाहरण भी शामिल किए गए थे और इन उल्लेखों का उनके यूरोपीय श्रोताओं ने ज़ोरदार तालियों के साथ स्वागत भी किया. मध्य पूर्व के बारे में उन्होंने कहा, "हमारे पास सबसे बड़ा मौक़ा और लक्ष्य है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो. कई बार ग़लत शुरुआतों, टूटती उम्मीदों और लोगों की मौतों के बाद अब इसराइल और फ़लस्तीन के बीच समझौता पहुँच के भीतर दिख रहा है." वैसे एक भाषण से कोई विदेश नीति तो नहीं बनती इसलिए अभी आगे भी संबंधों में उतार चढ़ाव तो देखने को मिलते ही रहेंगे क्योंकि यूरोप और अमरीका हमेशा सहमति के छोर पर ही नहीं रहेंगे. मगर राष्ट्रपति बुश के दोबारा सत्ता सँभालने के बाद से बुश प्रशासन ने यूरोपीय समुदाय के साथ संबंध सुधारने की सतर्कता से कोशिश की है. कई हफ़्तों से अमरीका इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि आख़िर यूरोपीय देशों के साथ उसके संबंध कितने अहम हैं. पिछले कुछ वर्षों से दोनों पक्षों के बीच जो भी असहमति चल रही है अब उस पर विराम लगाने की कोशिश हो रही है. वैसे बुश प्रशासन यूरोप में उतना लोकप्रिय नहीं है फिर वो चाहे ईरान का मुद्दा हो या जलवायु परिवर्तन का और शायद इसीलिए अब आश्वासनों के बजाए काम के ज़रिए ही लोगों की धारणा बदली जा सकेगी. |
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