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अब्बास से राइस की मुलाक़ात का इंतज़ार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व के दौरे पर पहुँची अमरीकी विदेश मंत्री आज फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास से मुलाक़ात करेंगी जिसके लिए वे पश्चिमी तट पहुँच चुकी हैं. राइस रविवार को इसराइल पहुँचीं और वहाँ उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से बातचीत की. उन्होंने इसराइल से कहा कि अब वक़्त आ गया है कि उसे फ़लस्तीनियों के साथ अपने संबंधों के मामले में मुश्किल फ़ैसले करने होंगे. राइस ने इसराइल से कहा कि वह शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और आम फ़लस्तीनियों को "आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए प्रोत्साहित" करने के लिए मुश्किल फ़ैसले करने के लिए तैयार रहे. राइस का यह दौरा ऐसे वक़्त पर हो रहा है जब मगंलवार को अरियल शेरॉन और महमूद अब्बास के बीच मिस्र में मुलाक़ात होगी.
महमूद अब्बास के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाक़ात होगी लेकिन इस बैठक में सिर्फ़ फ़लस्तीनी और इसराइली नेता होंगे, राइस वहाँ नहीं होंगी. अमरीका के विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद यह उनकी मध्य पूर्व की पहली यात्रा है. उम्मीद की जा रही है कि वह वहाँ दोनो पक्षों को यह संदेश देंगी कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश मध्य पूर्व में संघर्ष ख़त्म कर शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. कोंडोलीज़ा राइस की इन नेताओं से मुलाक़ात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनसे मिलने के बाद दोनों पक्षों के नेता मंगलवार को मिस्र में शिखर वार्ता शुरु करेंगे. फ़लस्तीनी क़ैदी उधर शिखर बैठक से पहले इसराइल और फ़लस्तीनी अधिकारियों में संयुक्त समिति बनाकर फ़लस्तीनी क़ैदियों के मुद्दे पर बातचीत करने पर सहमति हो गई है. यह संयुक्त समिति और इस मुद्दे पर बात मंगलवार को शिखर बैठक के बाद होगी. इससे पहले इसराइल ने कहा था कि उन फ़लस्तीनियों को रिहा नहीं किया जाएगा जिनपर हमले करने के आरोप हैं. इससे दोनो पक्षों में मतभेद पैदा हो गए थे और ऐसा लगता था कि इनका असर शिखर बैठक पर भी पड़ सकता. |
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