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शुक्रवार, 04 फ़रवरी, 2005 को 21:38 GMT तक के समाचार
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ईरान ने अमरीकी आरोपों का खंडन किया
राइस
राइस ने ब्रिटेन की यात्रा के दौरान ईरान को चेतावनी दी
ईरान ने अमरीका के इन आरोपों का खंडन किया है कि वह 'परमाणु हथियारों का कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा है और आतंकवाद को सहायता' दे रहा है.

ईरान के सरकारी टेलीविज़न चैनल ने कहा है कि अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ईरानी लोगों के ख़िलाफ़ मनोवैज्ञानिक लड़ाई का अमरीकी रवैया आगे बढ़ा रही हैं.

ग़ौरतलब है कि अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने शुक्रवार को यूरोपीय देशों का आहवान किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करने के लिए अमरीका के साथ एकजुट हो जाएँ.

कोंडोलीज़ा राइस ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एक अस्थिरता पैदा करने वाली ताक़त" और "आतंकवाद का मुख्य जन्मदाता" है.

राइस ने कहा, "ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अस्थिरता पैदा करने वाली ताक़त है और उन गतिविधियों को रोकने के लिए उद्देश्य की एकता और संदेश देने की एकता ज़रूरी है."

राइस ने कहा, "हम ईरान को साफ़ संदेश देना चाहते हैं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक संयुक्त मोर्चे की ज़रूरत है."

हालाँकि उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई फिलहाल अमरीका की प्राथमिकताओं में नहीं है.

दबाव

हाल के दिनों में ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी सैनिक कार्रवाई के बारे में उठ रही बातों के जवाब में ईरान की लगभग एक ही तरह की प्रतिक्रिया रहती है.

ईरान का तर्क है कि अमरीका उस पर इसलिए दबाव बढ़ा रहा है ताकि वह परमाणु कार्यक्रम पर यूरोपीय देशों के साथ होने वाली बातचीत में कुछ रियायतें दे सके.

बुश का भाषण
बुश ने भी हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी

लेकिन यह चिंताएँ भी उभरकर सामने आ रही हैं कि ईरान के प्रति अमरीका की बढ़ती अदावत की वजह से इस बातचीत पर असर पड़ सकता है.

ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार हसन रोहानी ने स्थानीय समाचार एजेंसी को बताया कि अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ साज़िश रचने और धमकियाँ देने में कोई क़सर नहीं छोड़ी है.

लेकिन रोहानी ने कहा कि ईरान ने उन धमकियों को एक मौक़े की तरह इस्तेमाल करते हुए यूरोप के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने कै फ़ैसला किया.

हसन रोहानी ने कहा कि ईरान बाक़ी देशों के साथ संपर्क क़ायम रखना चाहता है लेकिन उन्होंने आगाह किया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो संपर्क तोड़ा भी जा सकता है.

तेहरान में बीबीसी संवाददाता फ्रांसिस हैरीसन का कहना है कि रोहानी के इस संदेश से संकेत मिलता है कि अमरीका का बढ़ता दबाव यूरोप के साथ परमाणु बातचीत में शामिल रहना ईरान के लिए और मुश्किल बना सकता है.

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