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'इराक़ पर मतभेद भुलाकर आगे बढ़ें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका और जर्मनी ने इराक़ मुद्दे पर मतभेदों को भुलाने पर ज़ोर देते हुए कहा है कि संबंधों का नया दौर शुरू करना चाहिए. ग़ौरतलब है कि अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने अपने विदेश दौरे के अगले पड़ाव में शुक्रवार को जर्मनी के चांसलर गैरहर्ड श्रोडर से बर्लिन में मुलाक़ात की है. शुक्रवार को ही वह ब्रिटेन का दौरा कर चुकी हैं. चांसलर श्रोडर ने कहा कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य इराक़ को "लोकतांत्रिक आयाम देना है." ईरान मुद्दे पर श्रोडर ने कहा कि कूटनीति एक बेहतर विकल्प है जिस पर जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन पहले से ही अमल कर रहे हैं. राइस ने श्रोडर के इस बयान के जवाब में कहा कि इस नीति पर अमल करना सही है लेकिन एकजुट संदेश भेजा जाना चाहिए. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने यूरोपीय देशों का आहवान किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करने के लिए अमरीका के साथ एकजुट हो जाएँ. कोंडोलीज़ा राइस ने बीबीसी से बातचीत में शुक्रवार को कहा, "ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एक अस्थिरता पैदा करने वाली ताक़त" और "आतंकवाद का मुख्य जन्मदाता" है. लंदन में ही राइस ने कहा था कि फिलहाल ईरान पर हमला करना अमरीका की प्राथमिकताओं में नहीं है. |
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