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'इराक़ में अरबों डॉलर का घपला' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक सरकारी रिपोर्ट में इराक़ में अमरीकी प्रशासन की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि उसने क़रीब नौ अरब डॉलर के ख़ज़ाने का घपला किया. इराक़ में हो रहे पुनर्निर्माण कार्य के विशेष इंस्पैक्टर जनरल ने यह रिपोर्ट लिखी है. इस इंस्पैक्टर जनरल को यह ताक़त मिली हुई है कि इराक़ में युद्ध के बाद धन के बँटवारे का लेखा-जोखा रखे यानी यह देखे कि कितना धन कहाँ और किस तरह ख़र्च हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जून, 2004 तक इराक़ का प्रभारी रहा गठबंधन प्रशासनिक प्राधिकरण इराक़ का बजट को सही तरीक़े से संभालने में नाकाम रहा. ग़ौरतलब है कि 2003 में सद्दाम हुसैन का शासन ख़त्म होने के बाद अमरीका ने इराक़ की बागडोर एक प्रशासनिक प्राधिकरण को सौंपी थी जिसका काम देश का प्रशासन चलाने के साथ ही बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण का काम भी देखना था. इस काम में सड़कों, पुलों और स्कूलों का पुनर्निर्माण करना था. रिपोर्ट लिखने वाले मानते हैं कि इसमें कोई शक नहीं है कि अंतरिम प्रशासन बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों में काम कर रहा था मगर साथ ही रिपोर्टम में इराक़ में धन के संचालन की कड़ी आलोचना भी की गई है.
रिपोर्ट में ख़ासतौर से क़रीब आठ अरब, 80 करोड़ डॉलर की धनराशि का ज़िक्र किया गया है जो इराक़ी मंत्रियों को वेतन और पुनर्निर्माण की परियोजनाओं के लिए दी गई. रिपोर्ट में मिसाल देते हुए कहा गया है कि फ़रवरी, 2004 में क़रीब एक करोड़ 70 लाख डॉलर की धनराशि इराक़ी सिविल डिफ़ेंस के लिए काम करने वालों को दी गई लेकिन उस भुगतान के कोई दस्तावेज़ नहीं रखे गए. एक मंत्रालय में आठ हज़ार गार्डों को वेतन बाँटा दिखाया गया जबकि सिर्फ़ 600 गार्डों की मौजूदगी की ही पुष्टि की जा सकी. लेखा-जोखा इराक़ में अमरीकी प्रशासननिक प्राधिकरण के समय तेल के निर्यात से कुल 20 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी. प्रमुख लेखा अधिकारी गिंजर क्रूज़ कहती हैं कि 40 प्रतिशत धन पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था. "ऐसा कोई तालमेल नहीं था जो यह सुनिश्चित करता कि प्रशासन संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के तहत काम कर रहा है या नहीं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर ही धन इराक़ी लोगों पर ख़र्च किया जा रहा है." क्रूज़ ने कहा, "हमें लगता है कि प्रशासन पर ही यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी थी कि धन सही ढंग से ख़र्च किया जाए." बीबीसी संवाददाता गैरी नोर्थम ने इराक़ में इस धांधली और फ़िज़ूलख़र्ची की अपने तौर पर जाँच-पड़ताल की है.
उनका कहना है कि उन्हें कुछ ऐसे सबूत मिले हैं कि इराक़ में युद्ध ख़त्म होने के बाद धन के साथ लापरवाही बरती गई. मसलन - कई लाख डॉलर तिजोरी में बंद थे और उसकी चाबी दफ़्तर में एक खुले हुए बैग में रखी गई थी, क़रीब डेढ़ अरब डॉलर की नक़दी तीन हैलीकॉप्टरों में ले जाई गई, और जब बैंक में धन जमा किया गया तो कोई रसीद नहीं ली गई. इसके अलावा व्यापक रूप से धांधली के आरोप भी लगाए गए हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ी इस बात से ख़ासे नाराज़ है कि उनके देश के तेल के निर्यात से मिलने वाले धन को ठीक ढंग से संभाला नहीं गया है. इराक़ में तत्कालीन अमरीकी प्रशासन के प्रमुख पॉल ब्रेमर ने रिपोर्ट में सामने आए कुछ तथ्वों को ग़लत बताया है. उनका कहना है कि पश्चिमी देशों में हिसाब रखने के जो मानदंड हैं, उन्हें युद्ध के समय लागू नहीं किया जा सकता. बीबीसी संवाददाता एडम ब्रुक्स का कहना है कि इराक़ में पॉल ब्रेमर के नेतृत्व वाले अमरीकी प्रशासन पर सद्दाम हुसैन का शासन ख़त्म होने के बाद के महत्वपूर्ण दिनों में बदइंतज़ामी के बड़े आरोप लगे थे. |
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