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शनिवार, 29 जनवरी, 2005 को 16:47 GMT तक के समाचार
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इराक़ से आँखों देखा हाल

ब्रितानी सैनिक
ब्रितानी सैनिक चुनाव की वजह से अतिरिक्त चुस्ती दिखा रहे हैं
मैं ब्रितानी सेना के एक गश्ती दल के साथ दक्षिणी इराक़ के अल ज़ुबैर इलाक़े में घूम रही हूँ. गश्ती दल रात-दिन पूरे इलाक़े की चौकसी कर रहे हैं ताकि चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान सब कुछ शांतिपूर्ण हो.

ब्रितानी सेना का कहना है कि वह चुनाव में इराक़ी बलों के मददगार की भूमिका निभाएँगे और असली काम इराक़ी बलों को ही करना है लेकिन यह कहना आसान है मगर करना मुश्किल क्योंकि इराक़ी बल इस चुनौती से निबटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं.

नवगठित इराक़ी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी कर्नल हसन मजीद ने मुझसे साफ़ शब्दों में कहा कि "ब्रितानी फौज को यहाँ कम से कम दो साल तक रहना होगा क्योंकि हम पूरी तरह स्थिति को संभाल पाने में सक्षम नहीं हैं."

तीन दिनों से हम मतदान केंद्रो पर जा रहे हैं, प्राइमरी स्कूलों को मतदान केंद्र बनाया गया है, बच्चों की छुट्टियाँ चल रही हैं. मतदान केंद्रों को चुनाव के लिए तैयार किया जा रहा है.

प्लास्टिक के ढक्कन वाले डिब्बों को बैलेट बॉक्स बनाया गया है जबकि गत्ते के टुकड़ों से घेरकर पोलिंग बूथ बनाए गए हैं.

इस पूरे इलाक़े को देखकर सत्तर-अस्सी के दशक के भारत के पिछड़े इलाक़ों की याद आती है, अगर पश्चिमी देशों के लोगों के नज़िरए से देखें तो यह बहुत पिछड़ा दिखता है लेकिन किसी भारतीय के लिए कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है.

इराक़ी सुरक्षाकर्मी
इराक़ी बलों पर चुनाव की भारी ज़िम्मेदारी

सरकारी अधिकारियों और तेल कंपनी के अफ़सरों को चुनाव का प्रभारी बनाया गया है जो शांतिपूर्वक मतदान कराने की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं, ऐसे देश में जहाँ दशकों बाद कोई चुनाव हो रहे हैं.

मैं दक्षिणी इराक़ के जिस इलाक़े में हूँ वह शिया बहुल है, लोगों का कहना है कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग ज़रूर करेंगे. जिन लोगों से मेरी बात हुई उनमें से ज़्यादातर का कहना था कि वे शिया नेता अली सिस्तानी के समर्थन वाले गठबंधन यूनाइटेड इराक़ी एलायंस को वोट देंगे.

दूसरी ओर, कुछ ऐसे लोग भी मिले जिनका कहना है कि वे मौजूदा अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी को वोट देंगे क्योंकि उनका मानना है कि नजफ़ और करबला में जिस तरह वे विद्रोहियों से निबटे हैं उससे लगता है कि वे देश के लिए कुछ कर सकते हैं.

लोग कितना सच बोल रहे हैं इसका दावा करना ज़रा मुश्किल है क्योंकि मैं ब्रितानी सेना के साथ घूम रही हूँ इसलिए वे शायद वही कहेंगे जो ब्रितानी सैनिकों को पसंद आए.

इन चुनावों को लेकर तीन दिन पहले तक कुछ ख़ास उत्साह नहीं दिख रहा था लेकिन अब माहौल बनने लगा है, लोगों में अब चुनाव की सरगर्मी दिखाई दे रही है.

लेकिन हिंसा की आशंका भी बरकरार है जिसकी वजह से लोग डरे हुए हैं, दो दिन पहले ही यहाँ एक पुलिस स्टेशन के बाहर ज़ोरदार बम धमाका हुआ था जिसमें एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी.

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