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इराक़ में मतपेटियाँ रवाना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में रविवार को होने वाले चुनाव के लिए चुनाव अधिकारियों ने विभिन्न नगरों में मतपेटियाँ भेजना शुरू कर दिया है. मतपेटियाँ काफ़ी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान केंद्रों को भेजी जा रही हैं. इस बीच चुनाव की तैयारियों पर हमलों की छाया बरक़रार है और गुरुवार को हुए हमलों में कम से कम सात लोग मारे गए हैं. इस बीच हिंसा लगातार बढ़ती ही जा रही है. न्यूयॉर्क टाइम्स के एक सर्वेक्षण के हिसाब से दो तिहाई इराक़ी ऐसे इलाक़ों में रहते हैं जिनमें पिछले महीने हमले हुए हैं. मुख्य निशाना ब्रितानी सैनिक मतपेटियों के काफ़िले की सुरक्षा में लगे हैं और इस दौरान वे इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि कहीं कोई संदिग्ध कार खड़ी हो या ज़मीन कुछ समय पहले ही खुदी दिख रही हो. बम हमलों की आशंका को देखते हुए ये एहतियाती क़दम उठाए जा रहे हैं. काफ़िले के साथ जा रहे बीबीसी संवाददाता क्रिश्चियन फ़्रेज़र का कहना है कि ये एहतियाती क़दम इस आशंका की ओर ध्यान दिला रहे हैं कि शिया समुदाय के प्रभुत्व वाले इलाक़े प्रमुख रूप से निशाने पर हो सकते हैं. बग़दाद के दक्षिण में स्थित महमूदिया में सड़क के किनारे हुए एक बम विस्फोट में कम से कम तीन लोग मारे गए हैं. उधर बग़दाद के उत्तर में स्थित बाक़ुबा में हुए एक कार बम विस्फोट में एक व्यक्ति मारा गया है जबकि समारा में हुए ऐसे ही एक हमले में तीन लोग मारे गए. व्यापक विद्रोह इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स के अध्ययन के अनुसार रविवार को होने वाले चुनाव से पहले हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं. अध्ययन दिखाता है कि केंद्रीय इराक़ में सुन्नी मुसलमानों के प्रभाव वाले इलाक़ों में काफ़ी हिंसा हुई है जबकि बसरा में भी असंतोष बना हुआ है. इधर ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का कहना है कि इराक़ के 18 में से 14 प्रांत अपेक्षाकृत शांत हैं. जबकि अमरीकी रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने आशंका जताई है कि चुनाव से पहले हिंसा काफ़ी तेज़ हो सकती है. |
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