BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 30 जनवरी, 2005 को 04:10 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
क्या होगा सुन्नी बहिष्कार का परिणाम?

News image
शिया समुदाय के बड़े नेता सिस्तानी और मुक्तदा सद्र.
इराक़ के चुनावों की सफलता सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कितने लोग वोट डालेंगे बल्कि ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सभी समुदायों के लोग वोट डालें.

जिस तरह सुन्नी समुदाय वोट डालने के लिए आगे नहीं आ रहा उससे तो यही लगता है कि इस चुनाव की वैधता पर प्रश्न चिन्ह लग जाएँगे.

इराक़ के सुन्नी मुसलमान वैसे भी चुनावों को वैध नहीं मानते. नए राजनीतिक नेतृत्व पर उनका कतई विश्वास नहीं है और वो मानते हैं कि ये नेतृत्व सुरक्षा जैसे आधारभूत मसलों को सुलझाने में भी सक्षम नहीं है.

सुन्नी मानते हैं कि जब तक अमरीकी सेनाएँ इराक़ में हैं, सुरक्षा, बेरोज़गारी, और आधारभूत ढांचे की समस्याएँ नहीं सुलझेंगी.

हालाँकि इराक़ पर पैनी नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि समस्या सिर्फ शिया-सुन्नी तनाव ही नहीं है.

सुन्नियों में भी पूरी एकता नहीं है और उनके भी कई गुट हैं. कमोबेश यही हाल शियाओं का भी है.

शियाओं में बँटवारा

शियाओं में कुछ धार्मिक हैं तो कुछ खुद को धर्मनिरपेक्ष शिया मानते हैं.

News image
कहीं हथियार तो कहीं आम ज़रुरत के सामान का इंतज़ार

इससे आगे बढ़ें तो ईरानी शिया, अरब शिया, ग़रीब और अमीर शियाओं के अलग अलग धड़े हैं. ग़रीब शियाओ में मुक्तदा अल सद्र लोकप्रिय हैं तो कई शिया सद्र को अपना नेता नहीं मानते.

आयतुल्ला अली सिस्तानी को अधिकतर ईरानी शियाओं का समर्थन मिला हुआ है.

इन मतभेदों में एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो अमरीकी सेनाओं को पसंद नहीं करता और संभव है कि ऐसे लोग वोट डालने ही न जाएँ.

वैसे माना जा रहा है कि ऐसी परिस्थिति में भी यूनाइटेड इराक़ी अलायंस को सबसे अधिक मत मिलेंगे.

दूसरी ओर हैं मध्यवर्गीय शिया है जो अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी को अपना नेता मानते हैं.

सुन्नियों की स्थिति

सुन्नियों की स्थिति पूरे चुनाव को और पेचीदा बना देती है. इराक़ में शिया बहुसंख्यक हैं लेकिन पिछले कई दशकों से यहां सुन्नियों का राज रहा है.

सिर्फ 20 प्रतिशत सुन्नी जो बरसों से इराक़ पर राज करते रहे हैं, वो शियाओं के साथ काम करने को कतई राज़ी नहीं है.

सुन्नियों के धर्मगुरुओं ने स्पष्ट तौर पर चुनावों के बहिष्कार की न केवल अपील की है बल्कि धमकी भी दी है.

हालांकि एक सुन्नी पार्टी इराक़ी इस्लामिक पार्टी ने चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा की थी लेकिन अब वो भी बहिष्कार कर रहा है.

इन कारणों के चलते चुनावों के परिणामों के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल हो रहा है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>