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इराक़ में अमरीकी संकेत नहीं:कार्टर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने कहा है कि ऐसे कोई संकेत नहीं मिलते कि अमरीका सरकार इराक़ में शिया समुदाय को देश के घरेलू और विदेशी मामलों में नियंत्रण देगी. ग़ौरतलब है कि इराक़ में शिया समुदाय बहुमत में है और चुनावों के बाद भी राष्ट्रीय एसेंबली में उसे ही ज़्यादा सीटें मिलने की संभावना है. इराक़ में रविवार को चुनाव होने वाले हैं और राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वहाँ पर अमरीकी सेना के रहने या चले जाने के बारे में फ़ैसला करने का अधिकार चुनी हुई सरकार को होगा. बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में जिमी कार्टर ने कहा कि ऐसे भी कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं कि अमरीकी सेना इराक़ से बाहर निकले की कोई योजना बना रही हो. कार्टर ने कहा कि इसके उलट इराक़ में अस्थिरता के पलिए अंतरिम सरकार पर ज़िम्मेदारी डाली जा रही है और सवाल यह उठ रहा है कि क्या अंतरिम सरकार ऐसे सुरक्षा बल तैयार कर सकेगी जो शांति और व्यवस्था क़ायम करने में सक्षम हों. जिमी कार्टर ने कहा कि "अगर वह राष्ट्रपति होते तो अमरीका इराक़ में इस तरह से कभी नहीं गया होता." |
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