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शनिवार, 22 जनवरी, 2005 को 08:27 GMT तक के समाचार
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आपदाओं से निपटने के लिए कार्ययोजना
सूनामी चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में एक ऐसी कार्य योजना तैयार की है जिसमें प्राकृतिक आपदाओं में होने वाले जान-माल के नुक़सान को कम किया जा सकेगा.

पिछले साल 26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप और सूनामी लहरों से हुई भारी तबाही से उबरने के लिए जापान के कोबे शहर में हुए पाँच दिवसीय एक सम्मेलन में इस कार्ययोजना को मंज़ूरी दी गई.

सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने इस पर सहमति ज़ाहिर की कि प्राकृतिक आपदा की पहले से चेतावनी देने वाली प्रणाली विकसित की जाए और ऐसी आपदाओं से निपटने को प्राथमिकता पर रखा जाए.

लेकिन पाँच दिन चले इस सम्मेलन में इस मामले में कोई विशेष लक्ष्य हासिल करने या फिर इस कार्ययोजना पर अमल करने की किसी समय सीमा पर कोई सहमति नहीं हो सकी.

ग़ौरतलब है कि सूनामी लहरों से हुई तबाही में विभिन्न देशों में दो लाख बीस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों अन्य घायल हुए हैं. बहुत से लोग बेघर हो गए हैं.

कार्य योजना

जापान के कोबे शहर में हुए इस सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने कार्य योजना के मसौदे और शब्दावली पर ज़ोरदार बहस की और सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को इस मंज़ूरी दी गई.

इंडोनेशिया का आचे प्रांत
इंडोनेशिया में भारी तबाही हुई है

घोषणा पत्र में कहा गया है, "यह बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी देश की राष्ट्रीय नीति में प्राकृतिक आपदा से होने वाले ख़तरे से निबटने को उच्च प्राथमिकता दी जाए और यह किसी भी देश के पास उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं के अनुरूप होना चाहिए."

घोषणा पत्र में कहा गया कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस कार्ययोजना को सभी स्तरों पर ठोस कार्यरूप प्रदान किया जाए.

सम्मेलन में इस पर भी सहमति हुई कि हिंद महासागर में सूनामी चेतावनी प्रणाली का प्रभारी संयुक्त राष्ट्र को बनाया जाए. यह प्रणाली 18 महीनों में वजूद में आनी है.

इस योजना में देशों से अनुरोध किया गया है कि वे उपग्रह आधारित मौसम भविष्यवाणी का आदान-प्रदान करें, ज़रूरी नक्शे तैयार करें अगले दस साल में प्राकृतिक आपदा का मुक़ाबला करने की रणनीति तैयार करें.

हालाँकि संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख जैन इगेलैंड ने यह स्वीकार किया कि यह घोषणा पत्र व्यापक रूप में सिर्फ़ प्रतीकात्मक है.

इगेलैंड ने कहा, "इस सम्मेलन के फ़ैसले क़ानूनी रूप में बाध्य नहीं हैं लेकिन इस कार्ययोजना में देशों और संगठनों का मज़बूत नैतिक संकल्प नज़र आता है."

सम्मेलन कोई विशिष्ठ लक्ष्य या धन कहाँ से आएगा, इस बारे में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं कर सका.

संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि सलवैनो ब्रीसेनो ने कहा कि इतने बड़े सम्मेलन में विचारों में विविधता एक सामान्य बात है, " जब इतने सारे मतभेद हों, विभिन्न देशों की तरफ़ से अलग-अलग विचार सामने आएं, तो यह एक धीमी प्रक्रिया होती है."

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