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एक वर्ष तक कर्ज़ अदायगी से छूट मिली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी प्रभावित देशों की कर्ज़ अदायगी के मामले पर लेनदार देशों की एक बैठक में महत्वपूर्ण फैसला किया गया है, सूनामी प्रभावित देशों की कर्ज़ अदायगी तत्काल प्रभाव से रोकी जा रही है. उन्नीस धनी देशों के मंच 'पेरिस क्लब' की बैठक कहा गया कि कर्ज़ वसूली रोकने की कोई शर्त नहीं रखी जा रही है और यह एक वर्ष तक लागू रहेगी. दुनिया के सात प्रमुख औद्योगिक देशों के संगठन जी-7 की बैठक के बाद ही 'पेरिस क्लब' की बैठक बुलाई गई थी क्योंकि जी-7 ने कर्ज़ के मामले में प्रभावित देशों को रियायत देने की बात कही थी ताकि पुनर्वास का काम ठीक ढंग से चल सके. सूनामी प्रभावित देशों ने इस साल लगभग पाँच अरब डॉलर का कर्ज़ वापस करना है. अधिकतर कर्ज़ इंडोनेशिया और श्रीलंका ने लौटाना है. योजना ये है कि ये देश इस पैसे का इस्तेमाल सूनामी से पीड़ित लोगों की मदद के लिए कर सकें. इस प्रस्ताव को सात बड़े औद्योगिक देशों का समर्थन हासिल है. लेकिन अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इस रकम को राहत के लिए इस तरह इस्तेमाल किया जाए कि कर्ज़दार देशों को भविष्य में ज़्यादा बड़ी किस्तें न देनी पड़ें.
कुछ राहत संस्थाओं ने तो सिफ़ारिश की है कि कर्ज़ पूरी तरह माफ़ कर देना चाहिए लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसा होने की संभावना कम है. मंगलवार को दाता देशों की जीनेवा में हुई एक बैठक में पीड़ित लोगों को तत्काल मदद देने के लिए 70 करोड़ डॉलर दिए जाने का वादा किया गया. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वह इन देशों की प्रतिक्रिया से ख़ुश है लेकिन मदद की राशि को जल्द उपलब्ध करवाया जाए. |
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