BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 13 जनवरी, 2005 को 05:36 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
विद्रोहियों की संघर्षविराम की पेशकश
आचे
विद्रोहियों ने एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा पहले ही कर दी है
इंडोनेशिया में आचे प्रांत के विद्रोहियों ने संघर्ष विराम के लिए सरकार से अपील की है. 26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप के कारण सबसे ज़्यादा प्रभावित आचे प्रांत ही हुआ था.

लेकिन तबाही के बाद राहत कार्यों को लेकर सरकार और विद्रोहियों में ठन गई थी. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर स्थिति का लाभ उठाने के आरोप लगाए थे.

अब निर्वासन में रह रहे विद्रोहियों के नेता ने बयान जारी करके कहा है कि प्रभावी मानवीय सहायता के लिए अस्थायी समझौता ज़रूरी है. विद्रोहियों ने कहा है कि वे समझौते की शर्तों पर सरकार के साथ मिलकर बात करने को राज़ी हैं.

विद्रोहियों की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही इंडोनेशिया की सरकार ने आचे में काम कर रहे विदेशी सहायताकर्मियों पर पत्रकारों पर कुछ और पाबंदियाँ लगा दी हैं.

विद्रोहियों की ओर से आए बयान में कहा गया है कि वे भूकंप के बाद एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा पर क़ायम हैं.

जवाब

बयान में कहा गया है कि ये संघर्षविराम बिना किसी शर्त के हैं और इसकी कोई समयसीमा भी नहीं है. अब विद्रोही चाहते हैं कि सरकार उनके संघर्षविराम की पहल का जवाब दे और अपनी ओर से भी ऐसी ही घोषणा करे.

News image
सूनामी से सबसे ज़्यादा तबाही आचे प्रांत में हुई है

बयान में कहा गया है कि मानवीय सहायता बिना किसी बाधा के लोगों तक पहुँचे, इसके लिए सरकार को ऐसा क़दम उठाना चाहिए.

विद्रोहियों की ओर से बयान आने के एक दिन पहले ही इंडोनेशिया की सरकार ने आचे प्रांत में काम कर रहे विदेशी सहायताकर्मियों और पत्रकारों पर नई पाबंदियाँ लगा दी हैं.

इंडोनेशिया के सैनिक अधिकारियों का कहना है कि ऐसा उनकी सुरक्षा को लेकर किया गया है. जकार्ता से बीबीसी संवाददाता राचेल हार्वी का कहना है कि विद्रोही अपने बयान से ये साबित करना चाहते हैं कि आचे में संघर्ष की स्थिति नहीं.

विद्रोही ने गेंद सरकार के पाले में डालने की कोशिश की है और कहा है कि उनकी तरफ़ से तो संघर्षविराम पहले से ही लागू है.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसिलो बैमबांग युधोयोनो ने भूकंप से पहले भी कई बार कहा था कि आचे में समस्या का शांतिपूर्ण समाधान उनकी प्राथमिकता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विद्रोहियों की पेशकश के बाद अब सबकी नज़रे सरकार की प्रतिक्रिया पर है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>