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विद्रोहियों की संघर्षविराम की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया में आचे प्रांत के विद्रोहियों ने संघर्ष विराम के लिए सरकार से अपील की है. 26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप के कारण सबसे ज़्यादा प्रभावित आचे प्रांत ही हुआ था. लेकिन तबाही के बाद राहत कार्यों को लेकर सरकार और विद्रोहियों में ठन गई थी. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर स्थिति का लाभ उठाने के आरोप लगाए थे. अब निर्वासन में रह रहे विद्रोहियों के नेता ने बयान जारी करके कहा है कि प्रभावी मानवीय सहायता के लिए अस्थायी समझौता ज़रूरी है. विद्रोहियों ने कहा है कि वे समझौते की शर्तों पर सरकार के साथ मिलकर बात करने को राज़ी हैं. विद्रोहियों की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही इंडोनेशिया की सरकार ने आचे में काम कर रहे विदेशी सहायताकर्मियों पर पत्रकारों पर कुछ और पाबंदियाँ लगा दी हैं. विद्रोहियों की ओर से आए बयान में कहा गया है कि वे भूकंप के बाद एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा पर क़ायम हैं. जवाब बयान में कहा गया है कि ये संघर्षविराम बिना किसी शर्त के हैं और इसकी कोई समयसीमा भी नहीं है. अब विद्रोही चाहते हैं कि सरकार उनके संघर्षविराम की पहल का जवाब दे और अपनी ओर से भी ऐसी ही घोषणा करे.
बयान में कहा गया है कि मानवीय सहायता बिना किसी बाधा के लोगों तक पहुँचे, इसके लिए सरकार को ऐसा क़दम उठाना चाहिए. विद्रोहियों की ओर से बयान आने के एक दिन पहले ही इंडोनेशिया की सरकार ने आचे प्रांत में काम कर रहे विदेशी सहायताकर्मियों और पत्रकारों पर नई पाबंदियाँ लगा दी हैं. इंडोनेशिया के सैनिक अधिकारियों का कहना है कि ऐसा उनकी सुरक्षा को लेकर किया गया है. जकार्ता से बीबीसी संवाददाता राचेल हार्वी का कहना है कि विद्रोही अपने बयान से ये साबित करना चाहते हैं कि आचे में संघर्ष की स्थिति नहीं. विद्रोही ने गेंद सरकार के पाले में डालने की कोशिश की है और कहा है कि उनकी तरफ़ से तो संघर्षविराम पहले से ही लागू है. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसिलो बैमबांग युधोयोनो ने भूकंप से पहले भी कई बार कहा था कि आचे में समस्या का शांतिपूर्ण समाधान उनकी प्राथमिकता है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विद्रोहियों की पेशकश के बाद अब सबकी नज़रे सरकार की प्रतिक्रिया पर है. |
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