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'विदेशी सैनिकों के लिए समयसीमा नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया ने इस बात से इनकार किया है कि सूनामी राहत कार्यों में लगे विदेशी सैनिकों को मार्च तक देश छोड़कर जाने को कहा गया है. इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री जुवोनो सुदर्सोनो ने कहा कि 26 मार्च विदेशी सैनिकों के लिए कोई समयसीमा नहीं है बल्कि इस तारीख़ तक इंडोनेशिया के अधिकारी ज़्यादातर राहत कार्यों को अपने ज़िम्मे लेने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं. रक्षा मंत्री सुदर्सोनो ने रविवार को अमरीका के रक्षा उप मंत्री पॉल वूल्फ़ोविट्ज़ से बातचीत के बाद ये बयान दिया. एक दिन पहले ही वूल्फ़ोविट्ज़ ने कहा था कि अमरीका एशिया में सूनामी राहत कार्यों में जुटे अपने सैनिकों को जितना जल्दी हो सके हटाकर राहत कार्य वहाँ की सरकारों को सौंपना चाहता है. 26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप के कारण एक लाख 68 हज़ार लोग मारे गए थे. अकेले इंडोनेशिया में एक लाख 15 हज़ार लोग मारे गए. स्पष्टीकरण इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री जुवोनो सुदर्सोनो ने विदेशी सैनिकों के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "हम इस बात को ज़ोर देकर कहना चाहते हैं कि 26 मार्च विदेशी सैनिकों के लिए समयसीमा नहीं हैं."
उन्होंने कहा कि यह तारीख़ इंडोनेशिया सरकार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय तक सरकार ज़्यादातर राहत कार्यों का ज़िम्मा ख़ुद ही ले लेना चाहती है. सुदर्सोनो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विदेशी सैनिक इस अभियान में कुछ और समय तक लगे रहेंगे लेकिन धीरे-धीरे उनकी भूमिका कम होगी. इंडोनेशिया में सूनामी के कारण हुई तबाही के बाद अभी भी लाखों लोग बेघर हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने देश के दूर-दराज़ इलाक़ों में राहत सामग्री भेजनी शुरू की है. एजेंसी की योजना है कि इंडोनेशिया में 10 हज़ार टेंट और लगाए जाएँ और राहत सामग्री भी ज़्यादा मंगाई जाए. बीबीसी संवाददाता टिम जॉन्स्टन ने जकार्ता से ख़बर दी है कि सुमात्रा के तट पर खड़ा एक अमरीकी विमानवाहक पोत राहत कार्यों में काफ़ी मददगार साबित हो रहा है. कई हेलिकॉप्टर लोगों तक राहत सामग्री पहुँचा रहे हैं और घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है. |
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