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मंगलवार, 11 जनवरी, 2005 को 07:27 GMT तक के समाचार
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'गंभीर संकटों को न भूले दुनिया'
संयुक्त राष्ट्र कार्यालय
संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि सभी देश वादा किया हुआ धन दें
संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि दुनिया भर की बड़ी समस्याओं से निपटने के लिए उसी तरह का योगदान करें जैसा सूनामी के लिए किया गया है.

सूनामी प्रभावितों इलाक़ों में राहत सहायता को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र जेनेवा में एक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है.

इस बैठक में विचार किया जा रहा है कि सूनामी और अन्य विश्व स्तरीय आपदाओं से निपटने के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रवैया कैसा रहा है.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत कार्यों के देखरेख कर रहे जैन इग्लैंड ने कहा कि सूनामी के दौरान लोगों की मदद के मामले में नए मानदंड बने.

 अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दुनिया भर में एड्स और युद्ध की सूनामी लहरों से भी निपटना है जिससे ढाई करोड़ लोग प्रभावित हैं.
जैन इग्लैंड

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दुनिया भर में एड्स और युद्ध की सूनामी लहरों से भी निपटना है जिससे ढाई करोड़ लोग प्रभावित हैं.

इग्लैंड ने कहा कि देशों ने पांच अरब डालर से अधिक की मदद का वादा किया है लेकिन बीबीसी संवाददाता के अनुसार संयुक्त राष्ट्र यह जानना चाहता है कि कितने पैसे दिए जा रहे हैं, कब दिए जा रहे हैं और क्या ये पैसे दूसरे देशों की मदद से काटकर दिए जा रहे हैं.

अमरीका के सहायता प्रमुख एंड्रयू नातसियोस और यूरोपीय संघ के विकास आयुक्त लुइ माइकल के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे हैं.

पारदर्शिता ज़रुरी

जेनेवा बैठक से पांच दिन पहले जकार्ता में दाता देशों का एक सम्मेलन हुआ था जिसे संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान ने संबोधित किया था.

अन्नान ने अपील की थी कि सूनामी प्रभावितों के लिए एक अरब डालर की सहायता तुरंत मुहैया कराई जाए.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों ने मिलकर अब तक चार अरब डालर की मदद देने का वायदा किया है.

कई देश ऐसे हैं जो अभी भी राहत की राशि बढ़ा रहे हैं. कनाडा ने रविवार को मदद राशि क़रीब 6 करोड़ डालर से बढ़ाकर 35 करोड़ कर दी है.

सूनामी राहत का प्रबंधन

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा है कि सूनामी राहत के लिए जुटाए जाने वाले धन को फ़िज़ूलखर्ची से बचाने के लिए एक व्यावसायिक फर्म की मदद ली जाएगी.

इस अंतरराष्ट्रीय फर्म का नाम प्राइस वाटरहाउस कूपर है जो इन पैसों को लोगों तक पहुंचाने में पारदर्शिता लाएगा और किसी भी तरह की फ़िज़ूलखर्ची या गड़बड़ी पर नज़र रखेगा.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय
संयुक्त राष्ट्र का रवैया कड़ा है इस बार

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि व्यवस्था पुख्ता है लेकिन अभी भी धन को बेहतर ढंग से खर्च करने के उपाय सोचे जा रहे हैं.

पिछले दिनों इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के 60 अरब डालर के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम का लेखा जोखा निकाला गया तो पता चला कि कुप्रबंधन के कारण उसमें लाखों रुपए बर्बाद हो गए.

पूर्व के संकट

संयुक्त राष्ट्र को इस बात की भी चिंता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सूनामी संकट को भी उसी तरह न भुला दे जैसा कि पूर्व की प्राकृतिक आपदाओं के साथ होता रहा है.

पिछले साल ईरान में आए भूकंप के लिए कई करोड़ रुपए का वादा किया गया लेकिन बाद में पैसे दिए नहीं गए.

इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट दुनिया के दाता देशों से इस बात की भी अपील करेगा कि सूनामी के साथ ही दुनिया की और मानवीय आपदाओं मसलन दारफुर संकट, बुरुंडी और चेचन्या को नज़रअंदाज़ न किया जाए.

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