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आचे में राहत सामग्री पहुँचनी शुरु हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी हेलिकॉप्टरों ने इंडोनेशिया के आचे प्रांत के सुदूर इलाक़ों में राहत सामग्री गिरानी शुरू कर दी है. सूनामी लहरों और भूकंप से इस इलाक़े में जान-माल का सबसे अधिक नुक़सान हुआ है. राहत अधिकारियों का कहना है कि बहुत सारे इलाक़े पूरी तरह से कट गए थे और वहाँ फँसे लोगों तक राहत सामग्री पहुँचाना बहुत मुश्किल हो रहा था. सूनामी की चपेट में आकर मारे गए डेढ़ लाख से अधिक लोगों में तीन-चौथाई से भी ज़्यादा मौतें इंडोनेशिया में हुई हैं. लगभग एक दर्जन अमरीकी सी-हॉक हेलिकॉप्टर राहत सामग्री गिरा रहे हैं, ये हेलिकॉप्टर पश्चिमी आचे के समुद्री तट पर खड़े अमरीकी विमानवाही पोत से उड़ान भर रहे हैं. पिछले एक सप्ताह से आचे प्रांत में राहत सामग्री पहुँचाने में दिक्कतें आ रही थीं क्योंकि सूनामी की वजह से सड़क, पुल, हवाई पट्टी वगैरह सब कुछ तबाह हो चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र के राहत अभियान के प्रमुख माइकल एम्क्विस्ट ने कहा, "हम इन हेलिकॉप्टरों की मदद पर काफ़ी हद तक निर्भर हैं क्योंकि इनके अलावा हमारे पास राहत पहुंचाने का कोई दूसरा ज़रिया नहीं है." हेलिकॉप्टरों से राहत बाँटने वाले अधिकारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर वे उतर नहीं पा रहे हैं क्योंकि नीचे खड़े लोग राहत सामग्री पाने के लिए बहुत ही असंयत तरीक़े से उनकी तरफ़ भाग रहे हैं. एक अमरीकी सैनिक अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "लोग हेलिकॉप्टरों के नीचे से घुटने के बल रेंगकर दूसरी तरफ़ जा रहे हैं, पायलट का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं, वे टिड्डियों की तरफ़ हेलिकॉप्टर पर टूट पड़ते हैं, वे खाना-पानी पाने के लिए एक दूसरे के ऊपर चढ़े आ रहे हैं, वे बहुत ही बुरी हालत में हैं." आचे में सड़कों पर लाशें अब भी पड़ी हुई हैं, अधिकारियों का कहना है कि वे औसतन साढ़े तीन से चार हज़ार तक लाशें दफ़न कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगले दिनों में अगर वे छह हज़ार लाशें हर रोज़ दफ़नाएँगे तो भी सभी लाशों को दफ़न करने में पाँच वर्ष लगेंगे. इस बीच, अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल और राष्ट्रपति बुश के छोटे भाई जेब बुश रविवार को इंडोनेशिया और थाइलैंड के दौरे पर पहुँच रहे हैं. |
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