|
राहत कार्य में कई मुश्किलें : संयुक्त राष्ट्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंद महासागर में आए भूकंप और उससे उठे समुद्री उफान से मची तबाही के बाद पीड़ित लोगों की मदद के लिए एक विशाल अंतरराष्ट्रीय राहत अभियान शुरु हुआ है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि तबाह हुए क्षेत्रों में राहत पहुँचाने में अभूतपूर्व मुश्किलें आड़े आ रही हैं. इसका एक कारण ये भी है कि तबाह हुआ क्षेत्र दुनिया के दस देशों में फैला हुआ है. इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने वाले दस देशों में भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, बर्मा, बांग्लादेश और मालदीव शामिल हैं. मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है और ताज़ा अनुमान हैं कि 50 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, अन्य कई हज़ार लापता हैं. लाखों बेघर हुए इसके अतिरिक्त कई लाख लोग इस प्रकृतिक आपदा से विस्थापित हुए हैं और उनके घर और जीवन भर की संपत्ति नष्ट हो गई है. यही नहीं, जो लोग इस त्रासदी से जीवित बच निकले, उन्हें राहत सामग्री और विशेष तौर पर पीने का पानी मुहैया करवाना बड़ी चुनौती बनी हुई है.
नमकीन और खारा समुद्री पानी जब इन क्षेत्रों में दाख़िल हुआ तो पीने का पानी के स्रोत ख़राब हो गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में जगह-जगह शव बिखरे हुए हैं और इनका अंतिम संस्कार बड़ी समस्या बन गई है. इसमें जितना समय बीतता जा रहा है, उतनी ही बीमारियाँ फैलने की संभावना बढ़ रही है. ताज़ा आँकड़ो के अनुसार इंडोनेशिया के आचे प्रांत में ही 15 हज़ार लोग मारे गए हैं लेकिन पूरे इंडोनेशिया में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है. ये इसलिए कि सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र में तो राहतकर्मी पहुँच ही नहीं पाए हैं. श्रीलंका की सरकार का कहना है कि 18 हज़ार लोग मारे गए हैं लेकिन पीड़ित लोगों के रिश्तेदारों का मानना है कि लगभग 25 हज़ार लोग मारे गए होंगे. वहाँ कम से कम दस लाख लोग बेघर हो गए हैं. भारत में साढे आठ हज़ार लोग मारे गए हैं लेकिन ये संख्या भी ऊपर जा सकती है क्योंकि ताज़ा ख़बरों के अनुसार केवल एंडेमान-निकोबार द्वीप समूह में ही पाँच हज़ार लोग मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र की समस्या संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत कार्यक्रम के संयोजक जैन इगेलैंड ने कहा कि यह पहला मौक़ा है कि संगठन को एक ही मौक़े पर इतने देशों में इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा से निपटना पड़ रहा है. इगेलैंड ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इन सभी देशों में राहत कार्यों में समन्वय किस तरह बिठाया जाए.
उन्होंने बताया कि जैसी उन्हें सूचना मिली है, अगले कुछ दिनों में राहत कार्यों में संगठन के सैकड़ों विमान लगेंगे. श्रीलंका में एक राहतकर्मी ने कहा कि हालाँकि बहुत सी राहत सामग्री पहुँच रही है लेकिन यह बहुत ज़रूरी है कि उसे वितरित करने में समन्वय बिठाया जाए अन्यथा अव्यवस्था फैल सकती है. संपर्क बनाने की मुश्किल इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति यूसुफ़ कल्ला ने कहा कि सुमात्रा के बहुत से इलाकों में अब भी कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है और मृतकों की संख्या 25 हज़ार से भी ज़्यादा हो सकती है. अधिकारी मृतकों की संख्या सिर्फ़ शव गिनकर कर रहे हैं जबकि हो सकता है कि बहुत से शव पानी में बह गए होंगे जिससे मृतक संख्या बढ़ने की दलील दी जा रही है. सोमालिया के तटवर्ती इलाक़ों में भी इस प्राकृतिक आपदा से कुछ मौतें होने की ख़बरें हैं.
|
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||