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मुशर्रफ़ ने दोनों पदों पर स्थिति स्पष्ट की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अब लगभग स्पष्ट कर दिया है कि वे राष्ट्रपति और सेना प्रमुख दोनों ही पदों पर बने रहेंगे. मुशर्रफ़ ने कहा है कि 'ये उनकी नीतियों को चलाने के लिए आवश्यक होगा'. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने वादा किया था कि इस साल के अंत तक वो सेना प्रमुख का पद छोड़ देंगे. लेकिन अमरीका के अख़बार वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ये संकेत दे दिया है कि इस्लामिक पार्टियों के गठबंधन मुत्ताहिदा मजलिसे अमल से किया गया वादा वो तोड़ देंगे. पाकिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति मोहम्मद सुमरू ने 30 नवंबर को उस विधेयक को मंज़ूरी दे दी थी जिसके तहत मुशर्रफ़ दोनों ही पदों पर बने रह सकते हैं. इस विधेयक के क़ानून बनते ही देश के सूचना मंत्री शेख रशीद ने ये बयान दे दिया था कि मुशर्रफ़ दोनों ही पदों पर बने रहेंगे. लेकिन मुशर्रफ़ तब लातिनी अमरीकी देशों के दौरे पर थे और उनका ये बयान अमरीका पहुंच कर ही आया है. 'लोकतंत्र के लिए' कहा ये भी जा रहा है कि मुशर्रफ़ स्वयं इस बिल पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते थे क्योंकि ये असंवैधानिक होता. इसलिए कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाल रहे उपराष्ट्रपति सुमरू ने उनके विदेश दौरे पर जाने के बाद इस पर हस्ताक्षर किया. लेकिन क्या इससे पाकिस्तान में लोकतंत्र के विकास को झटका नहीं लगेगा, ये पूछे जाने पर मुशर्रफ़ ने थोड़ा उखड़ते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए बहुत कुछ किया है और मीडिया को भी उनके समय में काफ़ी आज़ादी दी गई है. उनका कहना था,"पाकिस्तान में लोकतंत्र के लिए जितना मैने वर्दी में रहते हुए किया है उतना पहले कभी नहीं किया गया." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को एक ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है जो पाकिस्तान को बिखरने से रोक सके और जो उसके राजनीतिक, सैनिक और प्रशासक वर्ग को एकजुट रख सके. मुशर्रफ़ ने कहा,"इस समय...मैं वो एकजुटता ला रहा हूं." |
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