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रविवार, 05 दिसंबर, 2004 को 07:06 GMT तक के समाचार
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द्विपक्षीय मामलों पर होगी बातचीत
बुश और मुशर्रफ़
बुश और मुशर्रफ़ के बीच ये आठवीं मुलाक़ात थी
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ दो दिन के ब्रिटेन दौरे पर रविवार को लंदन पहुँचे हैं और सोमवार को उनकी मुलाक़ात ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से हो रही है.

दोनों नेताओं की बातचीत के लिए तय विषयों में आपसी संबंधों के विभिन्न मुद्दों से लेकर कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है.

परवेज़ मुशर्रफ़ दक्षिण अमरीका, अमरीका और यूरोप के पाँच देशों की यात्रा के अंतिम दौर में ब्रिटेन पहुँचे हैं.

उन्होंने इससे पहले अमरीका दौरे में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात की जिन्होंने आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान की कोशिशों की सराहना की.

ऐसा बताया जा रहा था कि अमरीका इस ख़बर से चिंतित है कि पाकिस्तान अफ़गानिस्तान से लगे इलाक़ों में अपने सैनिकों की संख्या कम कर रहा है.

मगर राष्ट्रपति बुश ने परवेज़ मुशर्रफ़ की कोई आलोचना नहीं की और ये कहा कि मुशर्रफ़ अपने संकल्प पर अटल हैं.

उन्होंने साथ ही पाकिस्तानी राष्ट्रपति को ये भरोसा दिलाया कि वे फ़लस्तीनियों के लिए अलग राष्ट्र बनाए जाने का समर्थन करते हैं.

मुशर्रफ़ ने उनसे एक बार फिर कहा कि मध्य पूर्व के संकट का मुसलमान आबादी और आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई की सफलता के लिए बेहद ज़रूरी है.

वाशिंगटन स्थिति बीबीसी संवाददाता का कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपनी बातचीत में मध्य पूर्व का उल्लेख कर पाकिस्तान के कट्टरपंथियों को खुश करने की कोशिश की है क्योंकि वे पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों से ख़फ़ा हैं.

मुशर्रफ़ ने कहा है कि अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन की तलाश में कोई ख़ास सफलता नहीं मिल रही है क्योंकि अब इसके सुराग मिलने बंद हो गए हैं.

मुशर्रफ ने वाशिंगटन पोस्ट अख़बार से कहा कि लादेन की खोज में ढूंढे जा रहे सुराग अब नहीं मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में लादेन के बारे में कोई भी खुफिया जानकारी नहीं मिल रही है.

मुशर्रफ ने बताया कि पाकिस्तानी सेनाएं अल कायदा नेता की तलाश में अफगानिस्तान से लगी सीमा पर जी जान से जुटी हुई हैं.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के अनुसार पिछले दिनों मिली जानकारी से बस इतना स्पष्ट हुआ है कि लादेन अभी जीवित हैं.

उन्होंने अमरीका से अपील की कि अफगानिस्तान की सेना जल्द से जल्द प्रशिक्षित कर के तैयार की जाए क्योंकि ऐसा नहीं होने से अफगानिस्तान की सुरक्षा खतरे में है.

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