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बुश और मुशर्रफ की मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने वाशिंगटन में मुलाक़ात की है और कई मुद्दों पर चर्चा हुई है. दोनों नेताओं की बातचीत में आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई प्रमुख मुद्दा था. पाकिस्तान अफगानिस्तान सीमा पर अल कायदा और तालिबान के ख़िलाफ जारी लड़ाई पर दोनों नेताओं ने विशेष ध्यान दिया है. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि इस लड़ाई में मुशर्रफ का सहयोग और प्रदर्शन बेहतरीन रहा है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ़ जारी इस जंग में मुशर्रफ ने साहस से काम लिया है और चरमपंथियों को सुरक्षित स्थान नहीं दिया. इससे पहले व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्काट मैकलान ने कहा था कि दोनों देश इस मामले में गुप्त सूचनाओं का आदान प्रदान करते रहे हैं लेकिन उन्हें लगता है कि इस पर और भी बहुत कुछ किया जा सकता है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की अमरीका के राष्ट्रपति से ये आठवीं मुलाक़ात है जो दिखाता है कि अमरीका ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों को कितनी अहमियत दी है. पूर्व में पाकिस्तानी सेना कहती रही है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे दक्षिणी वज़ीरिस्तान के क़बायली इलाक़ों में उसने इस्लामी चरमपंथियों का सफ़ाया कर दिया है. हथियारों की बिक्री पाकिस्तानी कमांडरों का ये भी कहना है कि उसे ओसामा बिन लादेन या उसके किसी बड़े साथी के पाकिस्तान में होने के बारे में कोई पुख़्ता जानकारी नहीं मिली है. वैसे भारत-पाकिस्तान संबंधों पर बताने के लिए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के पास बहुत कुछ नहीं था. पाकिस्तान ने हाल ही में भारत पर शांति वार्ता की ओर से पैर वापस खींचने का आरोप लगाया है और कश्मीर के मसले पर भी बहुत प्रगति नहीं हुई है. एक अन्य बड़ा मसला पाकिस्तान को अमरीकी हथियारों की बिक्री का है और कहा जा रहा हैं कि इस मुद्दे पर कोई ख़ास बातचीत नहीं हो सकी. इससे पहले पाकिस्तान को अमरीका ने प्रमुख ग़ैर नैटो सहयोगी देश का दर्जा दिया था जिससे हथियारों की बिक्री का रास्ता खुल गया था. |
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