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फ़लूजा पर नियंत्रण पर राहतकर्मी बाहर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के फ़लूजा शहर पर अमरीकी सेना नियंत्रण का दावा कर रही है लेकिन अभी तक राहतकर्मियों को शहर में जाने की अनुमति नहीं दी गई हैं. ऐसी आशंका है कि फ़लूजा में हज़ारों लोगों के पास न तो भोजन है और न ही पीने के लिए साफ पानी. जब से अमरीकी हमला शुरु हुआ है फ़लूजा में हज़ारों लोग फंसे हुए हैं. छह दिन से चल रहे संघर्ष के बाद इराकी रेड क्रिसेंट के अधिकारी शहर के बाहर पहुंचे हैं लेकिन अमरीकी सेना का कहना है कि शहर में जाना राहतकर्मियों के लिए सुरक्षित नहीं है. इधर अमरीकी मैरीन सैनिकों का यह भी कहना है कि फ़लूजा में उन्होंने एक महिला की लाश देखी है जो शक्ल से किसी पश्चिमी देश की प्रतीत होती है. इस महिला का गला काटकर हत्या की गई है. फ़लूजा में पिछले दिनों पश्चिमी देशों की दो महिलाओं का अपहरण किया गया था जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चला है. अमरीकी सेना का कहना है कि उसने इराक़ी शहर फ़लूजा में विद्रोहियों के लगभग सभी ठिकानों को अपने नियंत्रण में ले लिया है. वहाँ पिछले छह दिनों से अमरीकी और इराक़ी सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष चल रहा है. अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड का कहना है कि हालांकि शहर में अब भी अमरीकी और इराक़ी सेना को छिटपुट प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है लेकिन ज़्यादातर हिस्सों पर अब सेना का नियंत्रण है. अमरीकी सेना के अधिकारियों ने भी कहा है कि फ़लूजा में लड़ाई लगभग ख़त्म हो गई है. एक अमरीकी कमांडर ने कहा है कि फ़लूजा में इस हफ़्ते हुई लड़ाई में 16 सौ विद्रोही मारे गए हैं. हालांकि इराक़ के रक्षा मंत्री क़ासिम दाउद ने मारे जाने वाले विद्रोहियों की संख्या एक हज़ार बताई है. उनका कहना है कि फ़लूजा में विद्रोह की अगुवाई कर रहे जॉर्डन के चरमपंथी मुसाब अल ज़रकावी का कोई पता नहीं चला है. सहायता सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद पहली बार फ़लूजा में रेड क्रिसेंट ने मानवीय सहायता पहुँचाई है. रेड क्रिसेंट के एक प्रवक्ता फ़िरदौस अल अबादी ने बताया कि अमरीकी चौकी पर लगी कुछ देरी के बाद पाँच लॉरी और तीन एंबुलेंस फ़लूजा में पहुँच गए हैं. ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार शहर में टायफाइड बीमारी फैल रही है. इराक़ी रेड क्रिसेंट का कहना है कि हज़ारों लोग जो सैनिक कार्रवाई शुरू होने से पहले फ़लूजा छोड़ कर चले गए थे, उन्हें भी संकट का सामना करना पड़ रहा है. रेड क्रिसेंट का कहना है कि इन लोगों को पास के शहर हब्बनिया में टेंट में रहना पड़ रहा है और उन्हें पानी भी नहीं मिल रहा. |
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