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फ़लूजा में रेड क्रिसेंट की सहायता पहुँची | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी शहर फ़लूजा में मानवीय संकट से निपटने के लिए रेड क्रिसेंट के अधिकारी सहायता सामग्री लेकर पहुँच गए हैं. अमरीकी सैनिक कमांडरों का कहना है कि फ़लूजा में सैनिक अभियान अपने आख़िरी दौर में है. पाँच दिन पहले इराक़ी और अमरीकी सैनिकों ने फ़लूजा में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर सैनिक कार्रवाई शुरू की थी. सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद पहली बार फ़लूजा में मानवीय सहायता पहुँचाई गई है. रेड क्रिसेंट के एक प्रवक्ता फ़िरदौस अल अबादी ने बताया कि अमरीकी चौकी पर लगी कुछ देरी के बाद पाँच लॉरी और तीन एंबुलेंस फ़लूजा में पहुँच गए हैं. ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार शहर में टायफॉयड बीमारी फैल रही है. इराक़ी रेड क्रिसेंट का कहना है कि हज़ारों लोग जो सैनिक कार्रवाई शुरू होने से पहले फ़लूजा छोड़ कर चले गए थे, उन्हें भी संकट का सामना करना पड़ रहा है. रेड क्रिसेंट का कहना है कि इन लोगों को पास के शहर हब्बनिया में टेंट में रहना पड़ रहा है और उन्हें पानी भी नहीं मिल रहा. विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई अभी भी जारी है. लेकिन सैनिक कार्रवाई के दौरान आम नागरिक भी वहाँ फँसे हुए हैं जिन्हें खाना-पानी भी नसीब नहीं. सैनिक कार्रवाई अमरीकी सैनिकों के साथ गए एक बीबीसी संवाददाता ने अमरीकी कमांडरों के हवाले से बताया है कि फ़लूजा में 1600 विद्रोही मारे गए हैं.
इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कासिम दाउद के अनुसार क़रीब 100 विद्रोहियों को पकड़ लिया गया है. उन्होंने कहा कि फ़लूजा अभियान पूरा हो गया है. दाउद ने बताया, "सिर्फ़ छोटे-मोटे प्रतिरोध के केंद्र हैं जिनसे हम निपट रहे हैं." अमरीकी सैनिक कमांडरों का कहना है कि उन्होंने शहर के 80 प्रतिशत इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लिया है और जल्द ही यहाँ सैनिक कार्रवाई ख़त्म हो जाएगी. बीबीसी संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि अमरीकी मरीन सैनिक शहर के केंद्र में पहुँच गए हैं. हालाँकि कई जगह विद्रोहियों के छोटे-छोटे गुट अभी भी अमरीकी सैनिकों से संघर्ष कर रहे हैं. इराक़ी रेड क्रिसेंट के ट्रक राहत सामग्री लेकर राजधानी बग़दाद से रवाना हुए थे. हालाँकि इस बात की गारंटी नहीं थी कि वे फ़लूजा में घुस भी पाएँगे या नहीं. पहले अमरीकी सैनिकों और इराक़ी अंतरिम सरकार ने फ़लूजा में राहत सामग्री भेजे जाने से मना कर दिया था. |
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