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अराफ़ात का शव काहिरा पहुँचा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात का शव पेरिस से फ्रांस के एक सैनिक हेलीकॉप्टर में मिस्र की राजधानी काहिरा पहुँच गया है जहाँ उनका जन्म हुआ था. वहाँ शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके जनाज़े की नमाज़ पढ़ी जाएगी जिसके बाद उन्हें रामल्ला में दफ़नाने की तैयारी की जा रही है जहाँ उनका मुख्यालय है. काहिरा में फ़लस्तीनी नेता को श्रद्धाँजलि देने के लिए दुनिया भर से राजनेता आने वाले हैं. इनमें भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह, रेल मंत्री लालू यादव, संसदीय कार्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद और विदेश राज्य मंत्री ई अहमद भी शामिल रहेंगे. यासिर अराफ़ात का निधन गुरूवार तड़के साढ़े तीन बजे पेरिस के अस्पताल में हुआ जहाँ 29 अक्तूबर को उनको भर्ती किया गया था. अराफ़ात की मौत कैसे हुई इस बारे में अभी भी कुछ नहीं बताया गया है. फ़्रांस सरकार का कहना है कि गोपनीयता संबंधी क़ानून के कारण वे ये नहीं बता सकते कि अराफ़ात की मौत कैसे हुई. उत्तराधिकारी अराफ़ात के निधन की ख़बर के आने के बाद गज़ा पट्टी से लेकर लेबनान और जोर्डन के फ़लस्तीनी शरणार्थी कैंपों में शोक मनाया जा रहा है. फ़लस्तीनी प्रशासन ने 40 दिनों के शोक की घोषणा की है और फ़लस्तीनी संसद के स्पीकर राव्ही फ़तह को अंतरिम प्रमुख बना दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री महमूद अब्बास को फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन पीएलओ का अध्यक्ष बना दिया गया है. राव्ही फ़तह ने कहा है कि फ़लस्तीनी राष्ट्रपति के लिए 60 दिन के भीतर चुनाव करवाए जाएँगे. रामल्ला राजकीय सम्मान के बाद अराफ़ात के शव को पश्चिमी तट के शहर रामल्ला ले जाया जाएगा जहाँ उनको दफ़नाया जाएगा. ऐसी ख़बरें है कि अराफ़ात को कंक्रीट के एक ऐसे ताबूत में दफ़न किया जाएगा जिसमें यरूशलम की अल अक़्सा मस्जिद की मिट्टी भी ली जाएगी. अराफ़ात की इच्छा थी कि उन्हें यरूशलम में ही दफ़नाने दिया जाए मगर इसराइल ने इसकी अनुमति नहीं दी. पिछले तीन वर्ष से अराफ़ात रामल्ला में ही नज़रबंद थे. फ़लस्तीनियों का कहना है कि उनको उम्मीद है कि कभी भविष्य में उनके ताबूत को यरूशलम ले जाने दिया जाएगा. |
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