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सोमवार, 11 अक्तूबर, 2004 को 22:15 GMT तक के समाचार
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ग़ज़ा योजना पर संसद में बहस होगी
अरियल शेरॉन
मध्य पूर्व में फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने की इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की योजना को मंज़ूरी के लिए एक पखवाड़े के अंदर संसद में रखा जाएगा.

अरियल शेरॉन ने सोमवार को संसद का सत्र शुरू होने के मौक़े पर कहा कि इस योजना पर संसद में 25 अक्तूबर को बहस कराई जाएगी.

इस योजना के तहत ग़ज़ा पट्टी में इसराइली सेनाएँ और क़रीब 8000 यहूदी बस्तियाँ अगले साल के आरंभ में इलाक़े से हटने का प्रस्ताव है.

हालाँकि संसद ने ग़ज़ा योजना पर शेरॉन के भाषण को 44 के मुक़ाबले 53 मतों से नामंज़ूर कर दिया लेकिन इस तरह के मतदान का नतीजा सरकार के लिए बाध्य नहीं होता है.

एक तरफ़ शेरॉन ने ग़ज़ा पट्टी से वापसी की योजना पर संसद में बहस की तारीख़ की घोषणा की दूसरी तरफ़ ग़ज़ा के उत्तरी इलाक़े में संदिग्ध फ़लस्तीनी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ इसराइली सेना का अभियान भी चल रहा है.

इसराइल ने ग़ज़ा पर 1967 में क़ब्ज़ा किया था और तब से यह इलाक़ा उसी के क़ब्ज़े में है. ग़ज़ा में क़रीब 13 लाख फ़लस्तीनी रहते हैं.

विभाजक मुद्दा

ग़ज़ा से वापसी की योजना पर संसद में बहस कराने की घोषणा का मतलब है कि सांसदों को इस योजना पर मतदान का मौक़ा मिलेगा. उससे एक दिन पहले ही इसराइली मंत्रिमंडल इस योजना पर विस्तृत विचार विमर्श करेगा.

इस योजना की प्रगति पर लगातार नज़र रखने का भरोसा दिलाते हुए शेरॉन ने कहा, "सुरक्षा की स्थिति सुनिश्चित करने का अधिकार हमारा ही होगा और योजना वास्तविकताओं के अनुरूप ही अपनाई जाएगी."

"हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता ख़ुद की सुरक्षा सुनिश्चित करने और चरमपंथी हमलों को रोकने की होगी."

शेरॉन की इस योजना को अमरीका सरकार का तो समर्थन मिला था लेकिन देश में उन्हें इसके लिए समर्थन जुटाना ख़ासा मुश्किल साबित हो रहा है.

इस साल के आरंभ में ही एक जनममतसंग्रह में लिकुद पार्टी ने इस योजना के विरोध में मतदान किया था.

और दो छोटे दलों ने जब से शेरॉन के गठबंधन से हाथ खींचा है तब से उन्हें संसद में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं है.

शेरॉन ने अपनी योजना को लागू करने का पक्का इरादा ज़ाहिर किया है और उम्मीद जताई है कि उनकी इस योजना को विपक्ष में बैठे वामपंथी दलों से समर्थन मिल जाएगा.

येरुशलम में बीबीसी संवाददाता मेथ्यू प्राइस का कहना है कि इस योजना पर संसद में पहली बार बहस होगी और अगर संसद इसे नामंज़ूर कर देती है तो पूरी प्रक्रिया को रोकना पड़ेगा.

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