BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 25 सितंबर, 2004 को 12:52 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
ग़ज़ा में इसराइल ने घर गिराए
इसराइली टैंक
टैंकों ने बहुत से घर मिट्टी में मिला दिए
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने कहा है कि इसराइल ने फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर ख़ान यूनुस में 200 से ज़्यादा फ़लस्तीनी शरणार्थियों के घर गिरा दिए हैं.

इसराइली सेना का कहना है कि उसने यह कार्रवाई चरमपंथियों की शुक्रवार को उस कार्रवाई के बाद की है जिसमें एक यहूदी बस्ती को निशाना बनाया गया था.

सेना का कहना है कि उस बस्ती पर मोर्टार के ज़रिए हमला किया गया था और मोर्टार ख़ान यूनुस की तरफ़ से दागा गया था.

शनिवार तड़के इसराइली सेना ने ख़ान यूनुस शिविर पर एक मिसाइल दागा जिसमें एक फ़लस्तीनी की मौत हो गई.

आधी रात को हुए मिसाइल हमले के बाद इसराइली सेना के बुलडोज़र और टैंक शिविर में घुस गए और घर गिराने शुरू कर दिए.

इसराइल ने कहा है कि उसने सिर्फ़ चरमंपथियों को निशाना बनाया है जबकि फ़लस्तीनियों का कहना है कि हमले में 55 साल का एक बुज़ुर्ग मारा गया है जिसका चरमपंथी गतिविधियों से कुछ लेना-देना नहीं था.

योम किप्पुर

यह हिंसा ऐसे मोक़े पर हुई है जब इसराइल में योम किप्पुर का त्यौहार मनाया जा रहा है. योम किप्पुर को यहुदियों का सबसे पवित्र त्यौहार माना जाता है.

 आसमान से हमले और टैंकों से हो रही गोलीबारी के बीच हमें अँधेरे में ही अपने घर छोड़कर भागना पड़ा. हम अपना कोई सामान भी नहीं ले सके, बस जो कपड़े पहने थे वही बचे हैं.
एक फ़लस्तीनी शरणार्थी

फ़लस्तीनी शरणार्थियों की देखभाल करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा है कि क़रीब 60 परिवारों के 230 से ज़्यादा लोगों के घर गिरा दिए गए हैं और अब उनके पास घर नाम की कोई चीज़ नहीं बची है.

चार बच्चों के पिता फ़ादी ज़रूब ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि अंधेरे में टैंकों और बुलडोज़रों ने घर गिराने शुरू किए और गोलीबारी की आवाज़ भी सुनी गई, तभी उन्हें अपने बच्चों को लेकर भागना पड़ा.

"आसमान से हमले और टैंकों से हो रही गोलीबारी के बीच हमें अँधेरे में ही अपने घर छोड़कर भागना पड़ा. हम अपना कोई सामान भी नहीं ले सके, बस जो कपड़े पहने थे वही बचे हैं."

लेकिन इसराइली सेना ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र ने जो आँकड़े बताए हैं उन्हें बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया है और जो भी इमारतें गिराई गई हैं उनमें कोई भी नहीं रहता था, वे ख़ाली पड़ी थीं.

सेना का कहना है कि उन इमारतों का इस्तेमाल फ़लस्तीनी चरमपंथी पास की यहूदी बस्तियों पर हमला करने के लिए करते थे.

ग़ज़ा पट्टी में बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्स्टन का कहना है कि पत्रकारों के लिए घटनास्थल पर जाकर वास्तविकता को देख पाना संभव नहीं है क्योंकि इसराइली सेना ने ख़ान यूनुस शिविर की तरफ़ जाने वाला रास्ता बंद कर दिया है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>