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शेरॉन ने कार्रवाई बढ़ाने को कहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी में सैनिक कार्रवाई बढ़ाने को कहा है. ग़ज़ा में चार दिन से जारी इसराइली सैनिक हमलों में पचास से ज़्यादा फ़लस्तीनी और कम से कम तीन इसराइली मारे गए हैं. शनिवार को भी इसराइली सेना ने ग़ज़ा पट्टी में दस फ़लस्तीनियों को मार डाला. इसराइली सेना का कहना है कि वह ग़ज़ा पट्टी में चरमपंथी संगठन हमास के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान चला रही है ताकि ग़ज़ा से होने वाले रॉकेट हमलों को रोका जा सके. ग़ज़ा में पिछले चार दिनों इसराइली सैनिक कार्रवाई में पचास से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं. इसराइली कार्रवाई मुख्य रूप से जबालिया शरणार्थी शिविर के आसपास ही हुई है. ग़ज़ा के उत्तरी हिस्से में अब भारी संख्या में इसराइली सेना मौजूद है. ग़ज़ा में इसराइली सेना अपने लक्ष्य की पहचान करती है और फिर तगड़ा हमला कर देती है. कल भी इसराइल के मिसाइल हमले में इस्लामी जिहाद के तीन सदस्य मारे गए. इसराइल ने कल तड़के ही एक अन्य रॉकेट हमले में एक चरमपंथी को मारने का दावा किया. कुछ देर बाद एक कार पर ताबड़तोड़ हमला किया और बताया गया कि उसमें सवार हमास के दो सदस्य मारे गए. एक इसराइली टैंक ने एक बाज़ार में रॉकेट दागा जिसमें 17 साल का एक किशोर भी मारा गया जिस पर ग़ज़ा के लोगों में भारी ग़ुस्सा देखा गया. लेकिन फ़लस्तीनी चरमपंथी भी इस लड़ाई से पीछे नहीं हटते नज़र आ रहे हैं. हमास ने कहा है कि वह इसराइल पर अपने मिसाइल दागने जारी रखेगा. हमास ने कहा है कि वह अपने इलाक़ों पर इसराइली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहा है. उधर फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने इसराइली हमले रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की. "हम विश्व समुदाय से अनुरोध करते हैं कि ये अमानवीय और नस्लवादी हमले रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई की जाए. मैं इसराइल में भी अमन पसंद भाइयों से शांति के लिए अपील करता हूँ." लेकिन इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने फ़लस्तीनियों की इन अपीलों को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा है कि इसराइली सेना को अपनी कार्रवाई ग़ज़ा पट्टी के कुछ और इलाक़ों तक बढ़ानी चाहिए. लेकिन अगर ख़ुद शेरॉन की योजना के अनुसार ही चला जाए तो इसराइली सेना को अगले साल ग़ज़ा के कुछ इलाक़ों से हटना होगा और साथ ही कुछ यहूदी बस्तियाँ भी हटेंगी. हालाँकि उनके विरोधियों का कहना है कि वहाँ से सेना हटने से इसराइली की छवि कमज़ोर होगी. |
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