| सैकड़ों इसराइली टैंक ग़ज़ा में घुसे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व में फ़लस्तीनी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि 100 इसराइली टैंक ग़ज़ा पट्टी के उत्तरी इलाक़े में दाख़िल होने के बाद घनी आबादी वाले जबालिया शरणार्थी शिविर और बेईत हनून लाहिया शहरों में घुसना शुरू हो गए हैं. कुछ ख़बरों में कहा गया है कि फ़लस्तीनी चरमपंथी टायर जलाकर धुँए के बादल बना रहे हैं ताकि इसराइली के हवाई हमलों को रोकने के लिए धुँध पैदा की जा सके. इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी में एक बड़ी कार्रवाई करने के लिए शुक्रवार को मंज़ूरी दी थी. इस कार्रवाई का मक़सद ग़ज़ा पट्टी की तरफ़ से होने वाले रॉकेट हमलों को रोकना बताया गया है. इस कार्रवाई के तहत ग़ज़ा पट्टी के कुछ इलाक़ों पर फिर से इसराइल का क़ब्ज़ा हो सकता है. इससे पहले गुरूवार का दिन क्षेत्र में काफ़ी हिंसा वाला रहा. ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई में कम से कम 28 फ़लस्तीनियों की मौत हो गई और 130 से ज़्यादा घायल हो गए. इसराइली सेनाओं ने ग़ज़ा के बीचोंबीच जेबालिया शरणार्थी शिविर में घुसकर वहाँ हमले किए और ऐसा पिछले क़रीब दो साल में पहली बार हुआ. एक स्कूल के निकट इसराइली टैंकों से हुई गोलीबारी में कम से कम सात फ़लस्तीनी मारे गए. गुरूवार को हुई इन झड़पों में तीन इसराइली भी मारे गए. जेबालिया शरणार्थी शिविर में क़रीब एक लाख लोग रहते हैं इससे पहले बुधवार को ग़ज़ा के निकट एक इसराइली शहर स्देरोत पर हुए एक रॉकेट हमले में दो इसराइली बच्चों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद इसराइली सेनाओं ने ग़ज़ा में भारी कार्रवाई की जिसमें अनेक फ़लस्तीनियों की मौत हो गई. बहुत से फ़लस्तीनी बेघर हो गए क्योंकि इसराइली टैंकों और बुलडोज़रों ने बहुत से घर गिरा दिए. फ़लस्तीनी प्रशासन ने इसराइली सेना की इस कार्रवाई को 'नृशंस हत्याकाँड' बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आपात बैठक बुलाने की माँग की है. ग़ज़ा पट्टी पर 1967 से ही इसराइल का क़ब्ज़ा है. बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्स्टन का कहना है कि ग़ज़ा पट्टी से इसराइल पर होने वाले रॉकेट हमलों से वहाँ क़ब्ज़ा ख़त्म करने की इसराइली योजना पर असर पड़ रहा है. संवाददाताओं का कहना है कि फ़लस्तीनी चरमपंथी यह दिखाना चाहते हैं कि इसराइल उनकी तरफ़ से हो रहे हमलों के हालात में ग़ज़ा से हट रहा है जबकि इससे हिंसा में बढ़ोत्तरी हो रही है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने हिंसा में तेज़ी आने पर चिंता जताई है और मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||