|
ख़ून और ख़ौफ़ की आँखो देखी कहानी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस के स्कूल बंधक कांड में जीवित बचने वाले लोगों ने रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी सुनाई है. बंदूकधारियों के चंगुल से छूटने के बाद एक शिक्षक ने बताया कि बंधक बनाए गए लोगों की संख्या डेढ़ हज़ार के करीब होगी. शुक्रवार को काँपते हुए बाहर निकले एक बच्चे ने पत्रकारों को बताया कि वह इतनी बुरी तरह डरा हुआ था कि वह अपने माँ-बाप को ही नहीं पहचान पाया. इस कांड में जीवित बच जाने पर राहत महसूस कर रहीं डायना ने बताया कि दो दिन तक उन्हें खाने-पीने को कुछ नहीं मिला. उन्होंने बताया, "हमें बोतलों में पेशाब करने और उसे पीने के लिए बाध्य किया जाता था." शुक्रवार के धमाके के बाद जितने बच्चे बाहर निकले उनमें से ज़्यादातर ने सिर्फ़ अंडरवियर पहने हुए थे क्योंकि बंदूकधारियों ने उन्हें जानवरों की तरह एक कोने में ठूँस रखा था और गर्मी के कारण वे बेहाल हो रहे थे. बम धमाके के बाद घायल हुए एक बच्चे ने एक रूसी टीवी चैनल को बताया कि धमाके की वजह से फैली अफरातफरी ने उन्हें भाग जाने का मौक़ा दिया. एक बच्चे ने धमाके के बारे में बताया, "धमाका बहुत तेज़ था, हम एक कुर्सी के पीछे छिप गए थे, बहुत देर तक डर के मारे हम ज़मीन पर पड़े रहे."
धमाके के बाद निकल भागने में सफल रहे एक व्यक्ति ने बताया कि जिन लोगों को रास्ता नहीं मिला वे खिड़कियों के शीशे तोड़कर भाग निकले. उन्होंने कहा, "हमारी क़िस्मत अच्छी थी कि स्पोर्ट्स हॉल में खिड़कियाँ प्लास्टिक की थी वर्ना निकलते समय हमें और चोट लग सकती थी." बच निकलने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि कितनी अफरातफरी का माहौल था, "लोग हर दिशा में भाग रहे थे, मैं उधर भागा जिधर ज़्यादातर लोग भाग रहे थे. बंदूकधारी भाग रहे लोगों पर छत से गोलियाँ चला रहे थे." विज्ञान की शिक्षिका रीटा गादज़िवोना को गुरूवार को ही उनकी तीन वर्षीया बेटी के साथ जाने दिया गया लेकिन उनके ग्यारह और चौदह वर्ष की दो बेटियाँ बंधक ही रहीं. रूस के एक अख़बार में रीटा का इंटरव्यू छपा है जिसमें उन्होंने बताया कि बंदूकधारियों ने मिनटों में ही स्कूल पर क़ब्ज़ा कर लिया था. रीटा ने बताया कि "बंदूकधारियों ने सारे लोगों को कसरत के हॉल में धकेलकर जमा किया और बास्केटबॉल के बास्केटों में दो तरफ़ बम लगा दिए." उन्होंने बताया कि बंदूकधारियों ने किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं किया लेकिन "वे हमें डराने के लिए हवा में गोलियाँ चलाते रहे." रीटा ने बताया, "बच्चों के रोने पर बंदूकधारी बुरी तरह झल्ला उठते थे और उन्हें डाँटते थे और हवा में गोलियाँ चलाते थे." आत्मघाती विस्फोट ज़लीना ज़ांदरोवा नाम की एक अन्य बंधक का कहना है कि बंदूकधारी गुट की दो महिलाओं ने पहले ही दिन एक गलियारे में अपने आप को बम से उड़ा दिया, उनके साथ कुछ पुरूष बंधक मारे गए. ज़लीना ने कहा, "इसके बाद मर्द बंदूकधारियों ने कहा कि उनकी बहनें विजयी रही हैं." ज़लीना का कहना है कि बंधक बनाने वालों ने पहले ही दिन लगभग 20 लोगों को गोली मार दी थी. उन्होंने बताया कि बंदूकधारियों ने उन लोगों को मार डाला जो विरोध कर रहे थे या फिर घायल थे. एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि "घायलों को गलियारे में ले जाकर फ़ौरन ख़त्म कर दिया गया." |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||