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आख़िर क्या कहना चाहते थे बुश? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपने भाषणों में अक्सर ग़लतियाँ करने वाले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस बार ऐसा कुछ कह दिया जिसका मतलब निकलता है कि 'उनका प्रशासन हमेशा अमरीका और वहाँ के लोगों को नुक़सान पहुँचाने के तरीक़े सोचता रहता है.' एक बानगी देखिए. अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन के अधिकारियों के साथ एक बैठक में बुश ने कहा, "हमारे दुश्मन नित नए-नए तरीक़े सोचते रहते हैं और सुविधासंपन्न हैं - और वैसे ही हम भी हैं,” “वे हमारे देश और हमारे लोगों को नुक़सान पहुँचाने के तरीक़े सोचना बंद नहीं करते – और न ही हम.” 417 अरब डॉलर के एक रक्षा विधेयक को पारित करने के लिए हस्ताक्षर समारोह के दौरान बुश भाषण दे रहे थे. राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैकक्लैलन का कहना है कि बुश की इन ग़लतियों पर चिंता करने के बजाय सांत्वना मिलनी चाहिए. उन्होंने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि बिल्कुल सीधी सच्ची बात बोलने वाले लोग भी ग़लती करते हैं. “अमरीकी जनता जानती है कि राष्ट्रपति सफ़ाई और पूरे विश्वास के साथ बोलते हैं और आतंकवादी जानते हैं कि राष्ट्रपति जो कहते हैं, कर के दिखाते हैं.” 'बुशिज़्म अमरीका में एक सज्जन जेकब वीसबर्ग ने तो यही धंधा बना लिया है. वे राष्ट्रपति बुश की ज़बान से फिसले जुमलों, शब्दों का बाक़ायदा हिसाब-किताब रखते हैं.
इन ग़लतियों को एक नया नाम दे दिया गया है – 'बुशिज़्म्स'. जेकब वीसबर्ग का कहना है कि ऐसी ग़लतियों से बुश को उतना नुक़सान नहीं होता है जितना आप अपेक्षा कर सकते हैं. “मुझे नहीं लगता कि उन्हें कोई नुक़सान होता है, क्योंकि जो लोग उनके बोलने के तरीक़े से चकित होते हैं, वही लोग अन्य कारणों से उन्हें बहुत पंसद भी करते हैं.” उनका कहना है कि जनता के सामने बुश की इन ग़लतियों के असर को कम नहीं आँकना चाहिए, इससे आम इंसान के साथ उनका रिश्ता और पुख़्ता होता है. “मुझे लगता है कि लोग उनकी समस्या को समझते हैं. आप जानते हैं कि जनता के सामने बोलना कठिन काम है – ग़लतियाँ हो जाती हैं और शर्मनाक भी हैं लेकिन यह बुश को लोगों से जुड़ता है.” |
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