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बुश ने इराक़ हमले को फिर सही बताया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में सैनिक कार्रवाई को लेकर कड़ी आलोचना झेल रहे अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक बार फिर अपने फ़ैसले को सही ठहराया है. पिछले दिनों अमरीकी सीनेट की एक ख़ुफ़िया समिति ने इराक़ में कथित महाविनाश के हथियारों के बारे में सबूतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की कड़ी आलोचना की थी. राष्ट्रपति बुश ने इराक़ में सैनिक कार्रवाई के अपने फ़ैसले का जम कर बचाव किया और कहा कि उनके पास और कोई रास्ता नहीं था. उन्होंने यह तो स्वीकार किया कि इराक़ में अभी तक महाविनाश के हथियार नहीं मिले हैं लेकिन यह बात भी दोहराई कि अमरीका को अपनी रक्षा के लिए यह क़दम उठाना ही पड़ा. रास्ते राष्ट्रपति बुश ने कहा, "मेरे पास दो रास्ते थे या तो मैं एक पागल व्यक्ति (सद्दाम हुसैन) की बात मानता या फिर अमरीका की रक्षा करता. अगर मेरे सामने ऐसे विकल्प हों तो मैं भविष्य में भी हर बार अमरीका की रक्षा करता रहूँगा." पिछले दिनों सीनेट की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में सीआईए को आड़े-हाथों लेते हुए उसकी कार्यशाली पर कई गंभीर सवाल उठाए थे. अमरीका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में इराक प्रमुख मुद्दा बनाता जा रहा है. राष्ट्रपति बुश को चुनौती दे रहे डेमोक्रेट उम्मीदवार जॉन कैरी ने कहा है कि इराक़ में सैनिक कार्रवाई के फ़ैसले से अमरीकी लोग और ज़्यादा असुरक्षित हो गए हैं. वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार में देश की सुरक्षा का विषय प्रमुख मुद्दा बन गया है. |
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