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क़ाज़ी होंगे इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के दूत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी को इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के अभियान का प्रमुख नियुक्त किया है. अनुभवी कूटनीतिज्ञ क़ाज़ी इससे पहले भारत, चीन, रूस, पूर्वी जर्मनी और सीरिया में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं. भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके पाकिस्तानी राजनयिक अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी के लिए ये काम मुश्किल भी होगा और ख़तरों से भरा भी. इराक़ में इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के दूत सर्गियो विएरा डि मेलो थे मगर अगस्त 2003 में बग़दाद स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को निशाना बनाकर किए गए एक कार बम हमले में उनकी मौत हो गई थी. उनके साथ संयुक्त राष्ट्र के कम से कम 20 कर्मचारी भी मारे गए थे. उसके बाद से ही ये पद खाली था और अन्नान ने कहा था कि उन्हें ऐसा व्यक्ति खोजने में परेशानी हो रही है जो ये पद स्वीकार करे. चुनौती कई लोगों ने इससे पहले ये ज़िम्मेदारी स्वीकार भी कर ली थी मगर परिजनों के दबाव की वजह से उन्होंने पद ठुकरा दिया. बीबीसी से बातचीत में अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी ने कहा, " जैसे ही मैंने सुना कि मैं इस पद के लिए चुना जा सकता हूँ तो मैं बहुत ही उत्साहित हुआ. मुझे लगा कि ये एक सुनहरा मौका है कि मैं इराक़ के लोगों की मदद कर सकूँ. मेरा माना है कि इराक़ के लोग बहुत ही भले लोग हैं और लंबे अरसे से उनपर अत्याचार होते रहे हैं. मुझे ख़ुशी है कि मैं इराक़ियों के काम आ सकूँगा." इससे कुछ दिन पहले मिली सूचनाओं के अनुसार क़ाज़ी के अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान जिन लोगों के नाम पर विचार कर रहे थे उनमें भारत के पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर और थाईलैंड के विदेश मंत्री सूरिन पित्सुवान का नाम भी प्रमुख था. अन्नान ने कहा है कि नए दूत इराक़ी राजधानी में ही रहेंगे लेकिन कितनी जल्दी अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी वहाँ जा पाएँगे ये अभी तय नहीं है. इराक़ में अपनी नई भूमिका और चुनौतियों के बारे में क़ाज़ी ने कहा, " मैं इन चुनौतियों को एक सकारात्मक रूप में देख रहा हूँ. हाँ, ये बात सही है कि सुचारू रूप से काम तभी शुरू हो सकेगा जब वहाँ स्थिति थोड़ी संभल जाती है." क़ाज़ी कहते हैं कि राजनीतिक और मानवीय पक्षों को संभालना और इराक़ के पुनर्निर्माण के काम को आगे बढ़ाने पर उनका ख़ास ध्यान होगा. इतना ही नहीं क़ाज़ी की ही वहाँ चुनाव कराने और नए संविधान का मसौदा तैयार करने में प्रमुख भूमिका होगी. |
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