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इराक़ी सीमा पर सीरिया सहमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सीरिया और इराक़ में साझी सीमा पर गश्त करने के लिए एक विशेष सुरक्षा बल के गठन और सीमा को सील करने पर सहमति हो गई है. इस सहमति का मक़सद है लड़ाकुओं को इराक़ में प्रवेश करने से रोकना. इराक़ के उपप्रधानमंत्री बरहाम सलीह और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के बीच सीरिया की राजधानी दमिश्क में हुए बैठक में ये समझौता हुआ है. इससे पहले अमरीका लगातार आरोप लगाता रहा है कि विदेशी लड़ाकू ही इराक़ में विद्रोह को हवा दे रहे हैं. वैसे इराक़ी उपप्रधानमंत्री सीरिया गए तो थे इराक़ के प्रधानमंत्री ईयाद अलावी की इस सप्ताह के अंत में होने वाली सीरिया यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने मगर वह लौटे एक बेहतर नतीजे के साथ. इस सौदे के तहत विशेष सुरक्षा बल दोनों देशों की साझा सीमा से इराक़ में प्रवेश करने वाले लड़ाकुओं को रोकने में मदद करेंगे और इसे पूरी तरह सील कर देंगे. ये समझौता एक तरह से सीरिया के ये मानने जैसा ही है कि विदेशी लड़ाकू उसकी सीमा पार करके जाते हैं और अमरीकी नेतृत्व वाली फ़ौजों को निशाना बनाते हैं. आसान नहीं होगा मगर सीमा को पूरी तरह सील करना इतना आसान भी नहीं होगा. इराक़ और सीरिया की लगभग 600 किलोमीटर लंबी सीमा से घुसपैठ की काफ़ी संभावनाएँ बनी रहती हैं. ये सीमा दरअसल बलुई ज़मीन पर एक ऐसी अदृश्य सी रेखा है जिसके इर्द-गिर्द स्थानीय क़बायली और तस्कर पीढ़ियों से घूमते रहे हैं. सीरिया हमेशा से कहता रहा है कि वह इसे रोकने के लिए हरसंभव कोशिशें कर रहा है मगर अमरीका ने इस साल की शुरुआत में ही सीरिया पर ये कहते हुए कुछ प्रतिबंध लगा दिए थे कि वह कुछ नहीं कर रहा है. इसके अलावा इराक़ के विदेश मंत्री ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था जिससे ये मतलब निकलता था कि सीरिय इस दिशा में कुछ नहीं कर रहा है. अब इसके बाद सीरिया के राष्ट्रपति असद ये उम्मीद करेंगे कि अब उनकी आलोचना शायद न हो. |
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