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अमरीका में चुनाव टालने की अटकलें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ओर अमरीकी प्रशासन कह रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में बाधा पहुँचाने के लिए चरमपंथी हमले हो सकते हैं और दूसरी ओर ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि बुश प्रशासन इसी आशंका को आधार बनाकर चुनाव टालने की योजना बना रहा है. इन ख़बरों ने विपक्षी डेमोक्रेट्स को राजनीतिक उहापोह में डाल दिया है. अमरीकी राष्ट्रपति का चुनाव नवंबर में होना है. ख़बरें हैं कि बुश प्रशासन ऐसी संभावनाएँ टटोल रहा है कि क्या किसी चरमपंथी हमले की स्थिति में चुनाव टाले जा सकते हैं. अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने न तो इन ख़बरों की पुष्टि की है और न ही इसका खंडन किया है. ख़बरें हैं कि नवंबर के चुनाव टालने के लिए अधिकार जुटाने के प्रयास चल रहे हैं. मीडिया ने कहा है कि अमरीकी संसद से कहा जा सकता है कि वह अमरीकी चुनाव आयोग को और अधिकार दे, हालाँकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये अधिकार हमले की स्थिति में माँगे जाएँगे या उसके बिना ही. डेमोक्रेट्स उधर डेमोक्रेट इसे लेकर बहुत चिंतित नहीं नज़र आते. संसद की ख़ुफ़िया मामलों की समिति की सदस्य और वरिष्ठ डेमोक्रेट नेता जेन हार्मन का कहना है कि यह प्रस्ताव उपलब्ध सूचनाओं पर असंयमित प्रतिक्रिया की तरह है. उन्होंने अमरीका के आंतरिक मामलों के मंत्री टॉम रिज के उस बयान की भी निंदा की जिसमें उन्होंने कहा था कि अल-क़ायदा चुनाव में बाधा पहुँचाने की योजना बना रहा है. हार्मन ने कहा कि यह चेतावनी पुरानी सूचनाओं पर आधारित थी. बीबीसी संवाददाता जस्टिन वेब का कहना है कि डेमोक्रेट्स चाहे जो कह रहे हों, उनको डर है कि बुश प्रशासन चुनाव के क़रीब डर का वातावरण बनाकर समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकता है. रिपब्लिकन की इस रणनीति का मुक़ाबला करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है क्योंकि वे यदि इसकी उपेक्षा करते हैं और सचमुच चरमपंथी हमला हो जाता है तो अमरीकी राजनीति में वे कहीं के नहीं बचेंगे. |
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