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आतंकवाद पर बुश-केरी में टकराव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में आतंकवाद के ख़तरे से कैसे निपटा जाए, इस मुद्दे पर राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और उनकी प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जॉन केरी के बीच अप्रत्यक्ष रूप से टकराव नज़र आया है. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने देश और विदेश में ख़ुफ़िया सूचनाएँ एकत्र करने और उनके तालमेल के लिए एक राष्ट्रीय खुफ़िया निदेशक का पद बनाने का फ़ैसला किया है. ग्यारह सितंबर 2001 के हमले की जाँच करने वाले आयोग ने इसका सुझाव दिया है. बुश ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उन्होंने संसद से राष्ट्रीय खुफ़िया निदेशक का एक नया पद बनाया जाने को कहा है. बुश का प्रस्ताव है कि राष्ट्रीय खुफ़िया निदेशक खुफ़िया मामलों में उनके मुख्य सलाहकार होंगे, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाएगा. राष्ट्रपति पद के लिए नवंबर में होने वाले चुनावों में डेमोक्रेटिक के उम्मीदवार जॉन केरी चाहते हैं कि सितंबर आयोग की सभी सिफ़ारिशें लागू की जाएँ. मतभेद केरी ने साथ ही कहा है कि ख़ुफ़िया निदेशक को कार्यकारी शक्तियाँ दी जाएँ ताकि वह ख़ुफ़िया सेवाओं के विभिन्न विभागों पर नियंत्रण रख सके. हालाँकि बुश ने भी कहा कि उनका प्रशासन चरमपंथियों से अमरीका की सुरक्षा के लिए जाँच आयोग की सिफ़ारिशों से भी आगे जाकर क़दम उठाएगा.
जॉन केरी ने यह भी कहा है कि सितंबर आयोग की रिपोर्ट पर खुली बहस कराने के लिए कांग्रेस का आपात सत्र बुलाया जाए. अमरीकी राष्ट्रपति ने 'आतंकवाद के विरुद्ध' एक राष्ट्रीय केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव किया है. यह केंद्र चरमपंथियों के बारे में आँकड़ों का विश्लेषण कर सकेगा. इस वक़्त अमरीका में कुल 15 खुफ़िया एजेंसियाँ हैं लेकिन उनका कोई एक सर्वेसर्वा नहीं है. प्रस्तावित नए पद पर बैठने वाला अधिकारी अब इन एजेंसियों के बीच तालमेल रख सकेगा. अमरीका में सुरक्षा और ख़ुफ़िया तंत्र में सुधार एक चुनावी मामला बनता दिख रहा है. विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन केरी ने चुनावी भाषण में ख़ुफ़िया तंत्र में सुधार का वादा किया है. |
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