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'क़ैदियों की तस्वीरें लेना केवल मज़ाक था' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अबू ग़रेब जेल में इराक़ियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों का सामना कर रही सैनिक लिंडी इंग्लैंड ने अमरीका में सुनवाई के दौरान कहा है कि क़ैदियों की तस्वीरें लेने का मकसद केवल 'मज़ाक' था. मामले की सुनवाई कर रही अमरीकी सैनिक अदालत तय करेगी कि लिंडी इंग्लैंड 'कोर्ट मार्शल' होंगी या नहीं. 21 वर्षीय लिंडी इंग्लैंड वही सैनिक हैं जिनकी तस्वीरें अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में सर्वाधिक प्रमुखता से सामने आईं. ये तस्वीरें छपने के बाद क़ैद इराक़ियों के साथ दुर्व्यवहार की दुनिया भर में कड़ी आलोचना हुई थी. इनमें से कुछ तस्वीरों में वह मुस्कुरा रही हैं और नक़ाब पहने निर्वस्त्र इराक़ी क़ैदियों की ओर संकेत कर रही हैं.
एक तस्वीर में लिंडी इंग्लैंड को एक क़ैदी के गले में पड़ा कुत्ते वाला पट्टा पकड़े दिखाया गया था और वह क़ैदी निर्वस्त्र था. सुनवाई के पहले दिन दो गवाह बुलाए गए. जाँचकर्ता पॉल आर्थर का कहना था, "सैनिकों को पता नहीं था कि मामला इतना गंभीर है...इसका मूल कारण तो मज़ाक ही था... और सैनिक इससे अपनी निराशा ही ज़ाहिर कर रहे थे." यदि 'कोर्ट मार्शल' होता है और लिंडी दोषी पाई जाती हैं तो उन्हें 30 साल से ज़्यादा की जेल की सज़ा हो सकती है. लिंडी की मनोदशा के बारे में उनके वकील रिक हरनांडेज़ का कहना है कि वे काफ़ी तनाव में हैं. इस बीच लिंडी के वकीलों और ख़ुद लिंडी का कहना है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के तहत ऐसा किया. इस तरह इस सुनवाई के बाद शायद ये स्पष्ट हो पाए कि अमरीकी हिरासत में क़ैदियों के साथ हुए दुर्व्यवहार को क्या वरिष्ठ अधिकारियों का समर्थन हासिल था? |
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